शरई आदाब

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हदीसों की सूची 192

जब कोई अपने भाई से मोहब्बत रखे, तो उसे बता दे कि वह उससे मोहब्बत रखता है।
एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना और छींकने वाले का उत्तर देना।
क्या तुम जानते हो कि ग़ीबत (चुग़लखोरी-पिशुनता) क्या है?" सहाबा ने कहा : अल्लाह और उसका रसूल अधिक जानते हैं। फ़रमाया : "तेरा अपने भाई की चर्चा ऐसी बात से करना, जो उसे पसंद न हो
किसी मुसलमान के लिए हलाल नहीं है कि अपने भाई से तीन दिन से अधिक बात-चीत बंद रखे, इस प्रकार कि दोनों मिलें, लेकिन यह भी मुँह फेर ले और वह भी मुँह फेर ले। उन दोनों में उत्तम वह है, जो पहले सलाम करे।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम खुशबू (पुष्पसार) वापस नहीं करते थे।
निश्चय अल्लाह बंदे की इस बात से खुश होता है कि बंदा कुछ खाए तो उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और कुछ पिए तो उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे।
बच्चे, बिस्मिल्लाह पढ़ लिया करो, दाहिने हाथ से खाया करो और अपने सामने से खाया करो।
जब तुममें से कोई खाना खाए, तो अपने दाएँ हाथ से खाए और तुममें से कोई कुछ पिए तो अपने दाएँ हाथ से पिए। क्योंकि शैतान अपने बाएँ हाथ से खाता और बाएँ हाथ से पीता है।
न रेशम पहनो और न दीबाज (मोटे रेशमी वस्त्र)। न सोने-चाँदी के बरतन में पियो और न उनकी थाली में खाओ। क्योंकि यह वस्तुएँ दुनिया में उन (काफ़िरों) के लिए हैं और आख़िरत में हमारे लिए।
जिसने दुनिया में रेशमी वस्त्र पहना, वह उसे आख़िरत में नहीं पहनेगा।
इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे।
ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई जनाबत (नापाकी) की अवस्था में सो सकता है? आपने फ़रमायाः हाँ, जब तुममें से कोई वज़ू कर ले, तो सो सकता है।
जब तुममें से कोई वज़ू करे, तो अपनी नाक में पानी डालकर नाक झाड़े, और जो ढेलों से इस्तिंजा (शौच या मूत्र से पवित्रता अर्जन) करे, वह बेजोड़ (विषम) संख्या प्रयोग करे
तुममें से कोई व्यक्ति पेशाब करते समय अपने लिंग को दाएँ हाथ से न पकड़े तथा दाएँ हाथ से इस्तिंजा (पेशाब-पाखाना से पवित्रता प्राप्त) न करे एवं कुछ पीते समय बरतन में साँस न ले।
जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लगे, तो (जान ले कि) यह सपना अल्लाह की ओर से है। अतः उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और उसे (लागों को) बताए। और जब इसके विपरीत ऐसा सपना देखे, जो उसे बुरा लगे, तो (जान ले कि) यह शैतान की ओर से है। अतः उससे अल्लाह की शरण माँगे और किसी को न बताए। इससे उसे कोई हानि नहीं होने वाली।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब छींकते, तो अपना हाथ या कपड़ा अपने मुँह पर रख लेते और अपनी आवाज़ धीमी (या नीची) रखते।
एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास बाएँ हाथ से खाना खाया, तो आपने कहा : "दाएँ हाथ से खा।" वह बोला : मैं इसकी ताक़त नहीं रखता। चुनांचे आपने फरमाया : "तूझे इसकी ताक़त न हो
यह कौन होता है मुझपर क़सम उठाने वाला कि मैं अमुक व्यक्ति को क्षमा नहीं करूँगा? मैंने उसे क्षमा कर दिया और तेरे कर्मों को व्यर्थ कर दिया।
कोई बंदा एक बात करता है और उसमें सोच-विचार नहीं करता, जिसके कारण वह जहन्नम के गढ़े में उससे कहीं अधिक दूर जा गिरता है, जितनी दूरी पूरब और पश्चिम के बीच में है।
जब तुममें से कोई अपने भाई से मिले, तो उसे सलाम करे। फिर, अगर दोनों के बीच पेड़, दीवार या पत्थर आ जाए और वह उससे (दोबारा) मिले, तो फिर उसे सलाम करे।
अच्छा सपना अल्लाह की ओर से है और बुरा सपना शैतान की ओर से। अतः जब तुम में से कोई व्यक्ति डरावना सपना देखे, तो तीन बार बाएँ ओर थुत्कारे और उस सपने की बुराई से अल्लाह की शरण माँगे,(ऐसा करने से) यह उसकी हानि नहीं करेगा।
मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो।
मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र्ज़ ज़कात अदा करो और रमज़ान के रोज़े रखो।
जिसने स्वप्न में मुझे देखा, वह जागते हुए भी मुझे देखेगा या कहा कि उसने मानो, मुझे जागते में देखा क्योंके शैतान मेरा रूप धारण नहीं कर सकता।
सवार पैदल चलने वाले को सलाम करेगा, पैदल चलने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कभी किसी खाने में ऐब नहीं निकाला। यदि इच्छा हुई, तो खाया और यदि इच्छा नहीं हुई, तो छोड़ दिया।
यहूदियों तथा इसाइयों को पहले सलाम न करो और जब रास्ते में उनसे भेंट हो जाए, तो उन्हें तंग रास्ता अख़्तियार करने पर विवश कर दो।
जब तुममें से कोई जूता पहने, तो दाएँ पाँव से शुरू करे और जब जूता उतारे, तो बाएँ पाँव से शुरू करे। दाएँ पाँव में पहले जूता पहना जाए और बाद में उतारा जाए।
कोई भी वस्तु तराज़ू में अच्छे आचरण से ज़्यादा भारी नहीं होगी और अल्लाह ऐसे व्यक्ति से नफ़रत करता है, जो बदज़ुबान और अनर्गल बकने वाला हो।
"बड़े पापों में से एक यह है कि आदमी अपने माता-पिता को गाली दे।" कहा गया कि क्या आदमी अपने माता-पिता को गाली दे सकता है? तो फ़रमायाः "हाँ, आदमी किसी के बाप को गाली दे, तो वह उसके बाप को गाली दे और आदमी किसी की माँ को गाली दे, तो वह उसकी माँ को गाली दे।"
जो लोगों की बात कान लगाकर सुने, जबकि उन्हें यह पसंद न हो, तो क़यामत के दिन उसके कानों में सीसा पिघलाकर डाला जाएगा।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे पास आए, तो हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम यह तो जान गए हैं कि हम आप पर सलाम कैसे भेजें, लेकिन हम आप पर दरूद कैसे भेजें?
मैंने अनस (रज़ियल्लाहु अंहु) से पूछाः क्या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सहाबा में मुसाफ़हे (मुलाक़ात के समय हाथ मिलाने) का चलन था? तो फ़रमायाः हाँ!
जो व्यक्ति हमारी मस्जिदों या बाज़ारों से गुज़रे तथा उसके हाथ में तीर हो तो उसके फल को अच्छी तरह पकड़ ले या उसके फल को अपनी मुठ्ठी में दबा ले, ताकि ऐसा न हो कि किसी मुसलमान को उसकी नोक लग जाए।
“यदि ऐसा करना ज़रूरी हो, तो रास्ते को उसका हक़ दो।" लोगों ने पूछाः उसका हक़ क्या है? आपने फ़रमायाः "नज़र नीचे रखना, कष्टदायक वस्तुओं को रास्ते से हटाना, सलाम का उत्तर देना, भलाई का आदेश देना तथा बुराई से रोकना।”
बरबादी है उस व्यक्ति के लिए, जो लोगों से बात करता है और उन्हें हँसाने के लिए झूठ बोलता है। बरबादी है उसके लिए। फिर बरबादी है उसके लिए।
जिसे ख़ुशबू भेंट की जाए, वह उसे न लौटाए। क्योंकि वह उठाने में हलकी तथा सुगंधित होती है।
एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि इस्लाम का कौन-सा कार्य सबसे अच्छा है? आपने उत्तर दिया : "यह कि तुम खाना खिलाओ और जाने-पहचाने तथा अनजान सबको सलाम करो।
अल्लाह के निकट सबसे घटिया और तुच्छ व्यक्ति वह है, जो शहंशाह कहलवाए। वास्तविक बादशाह तो बस अल्लाह है।
जब तीन व्यक्ति किसी यात्रा में निकलें तो अपने में किसी को सरदार बना लें।
अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी बीमार व्यक्ति को देखने के लिए जाते तो फ़रमातेः لا بأس طهور إن شاء الله, अर्थात, कोई चिंता की बात नहीं है, यह बीमारी गुनाहों से पाक करने वाली है।
एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई अपने भाई अथवा अपने दोस्त से मिलते समय उसके लिए झुक जाए? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः क्या उसे गले से लगा ले और बोसा दे? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः फिर क्या उसका हाथ पकड़े और उससे मुसाफ़हा करे? फ़रमायाः हाँ।
जिससे ज्ञान से संबंधित कुछ पूछा गया और उस ने उसे छिपा लिया, तो उसे क़यामत के दिन आग की लगाम पहनाई जाएगी
जिसने यह कहकर क़सम खाई कि लात तथा उज़्ज़ा की क़सम, वह 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहे और जिसने अपने साथी से कहा कि आओ हम जुआ खेलें, वह सद्क़ा करे।
जब कोई बंदा किसी वस्तु पर धिक्कार करता है, तो धिक्कार आकाश की ओर चल देता है, लेकिन उसके लिए आकाश के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। अतः, वह धरती की ओर उतरने लगता है, लेकिन धरती के द्वार भी उसके लिए बंद कर दिए जाते हैं। फिर वह दाएँ-बाएँ जाने का प्रयास करता है, लेकिन जब कहीं कोई जगह नहीं मिलती, तो उसकी ओर लौटता है, जिसपर धिक्कार किया गया है। यदि वह उसके योग्य है, तो ठीक। अन्यथा, धिक्कार करने वाले की ओर लौट जाता है।
एक मर्द दूसरे मर्द के गुप्तांग और एक महिला दूसरी महिला के गुप्तांग को न देखे
मुनाफ़िक़ को सैयद (आक़ा, सरदार) मत कहो, क्योंकि यदि वह सैयद है, तो तुमने अपने रब को नाराज़ किया
मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे।
उन लोगों के समीप अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक प्रिय कोई भी नहीं था, (इसके बावजूद) वह लोग आप को देख कर खड़े नहीं होते थे क्योंकि वह जानते थे कि अल्लाह के रसूल (- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-) इस से घृणा करते हैं।
खुले तौर पर क़ुरआन पढ़ने वाला खुले तौर पर सदक़ा करने वाले की तरह है। जबकि छुपाकर क़ुरआन पढ़ने वाला छुपाकर सदक़ा करने वाले की तरह है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब प्रत्येक रात बिस्तर में जाते, तो अपनी दोनों हथेलियों को जमा करते, फिर उनमें फूँकते और उनमें "क़ुल हु-वल्लाहु अहद", "क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़" और "क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिन नास
चार बातें जिस व्यक्ति के अंदर होंगी, वह शुद्ध मुनाफ़िक़ होगा। जिसके अंदर इनमें से एक बात होगी, उसके अंदर उसे छोड़ देने तक निफ़ाक़ की एक बात होगी। जब बात करे, तब झूठ बोले, जब वचन दे, तो तोड़ डाले और जब झगड़े तो बद-ज़बानी करे।
मोमिन ताना देने वाला, लानत करने वाला, बदज़ुबान और अनर्गल बकने वाला नहीं होता।
तुम ऐसे लोगों के घरों में रोते हुए प्रवेश करो, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किए हैं। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी प्रकार के अज़ाब का सामना करना पड़ जाए, जिस प्रकार के अज़ाब का सामना उन्हें करना पड़ा है।
जब तुम में से कोई खाना खा चुके, तो अपना हाथ चाटे अथवा चटवाए बिना साफ़ किए।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें सात बातों का आदेश दिया है और सात जीचों से रोका है
शराब हराम की गई, वह पाँच वस्तुओं से बनती थीः अंगूर, खजूर, मधु, गेहूँ और जौ से।
यदि कोई व्यक्ति तुम्हारी अनुमति के बिना तुम्हें झाँके और तुम कंकड़ मारकर उसकी आँख फोड़ दो, तो तुम्हें कोई गुनाह न होगा
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो अथवा तीन अथवा चार अंगुल समान रेशम पहनने की अनुमति दी है
क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया
आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया कि कह लिया करोः اللهم فاطِرَ السماوات والأرض عالم الغيبِ والشهادة، ربَّ كُلِّ شَيءٍ ومَلِيكَه، أَشْهد أن لا إله إلا أنت، أعوذ بك من شرِّ نفسي وشرِّ الشيطان وشِرْكِهِ
जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात तथा अतिथि सत्कार तीन दिन है। जो इससे अधिक हो वह अतिथि के ऊपर सदक़ा है।
अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपनी सवारी की पीठ पर नफ़ल नमाज़ पढ़ लिया करते थे, चाहे आपका मुँह जिधर भी होता। आप अपने सिर से इशारा करते थे। तथा इब्ने उमर - रज़ियल्लाहु अन्हुमा- भी ऐसा करते थे।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के समय में मैं छोटा च्चा था, और मुझे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की कुछ बातें याद होती थीं, परन्तु, उन्हें बयान करने से मुझे केवल यह बात रोकती थी कि मुझसे अधिक आयु वाले लोग भी मौजूद होते थे।
अतः, जो भी बंदा प्लेग से ग्रस्त हो जाय और धैर्य के साथ तथा सवाब की आशा में अपने नगर में ठहरा रहे, तथा यह विश्वास रखे कि उसे वही पहुँच सकता है, जो अल्लाह ने उसके लिए लिख दिया है, उसे शहीद के बराबर नेकी मिलेगी।
जब तुममें से कोई सभा में आए, तो सलाम करे और जब सभा से निकलना चाहे तो सलाम करे, क्योंकि पहला सलाम दूसरे से अधिक हक़दार नहीं है।
जब हम लोग नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आते, तो जिसको मजलिस के अंत में जहाँ स्थान मिलता, वहीं बैठ जाता।
जो किसी बीमार व्यक्ति का हाल जानने जाता है या अपने किसी भाई से अल्लाह के लिए मिलने जाता है, तो एक पुकारने वाला उसे यह कहकर पुकारता है कि तुझे मुबारक हो, तेरा चलकर जाना मुबारक हो और तुझे जन्नत में ठिकाना नसीब हो।
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई बात कहते, तो तीन बार कहते, ताकि आपकी बात को ठीक से समझ लिया जाए और जब किसी समूह के पास जाते और उन्हें सलाम करते, तो तीन बार सलाम करते।
जब खाते समय अल्लाह का नाम न लिया जाए तो उस खाने में शैतान शामिल हो जाता है। वही इस बच्ची को लाया था, ताकि इसके माध्यम से खाने में शरीक हो जाए। अतः, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। फिर इस देहाती को ले आया ताकि उसके बहाने शरीक हो जाए, परन्तु मैंने उसका हाथ भी पकड़ लिया। उस अल्लाह की क़सम! जिसके हाथ में मेरे प्राण हैं, शैतान का हाथ इन दोनों के हाथों के साथ मेरे हाथ में है।
जब अल्लाह ने आदम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पैदा किया तो कहा कि जाओ और उन (बैठे हुए फ़रिश्तों) को सलाम करो और सुनो कि वे क्या उत्तर देते हैं, क्योंकि वही तुम्हारा और तुम्हारी संतान का सलाम होगा।
जब दुनिया की समाप्ति का समय निकट आ जाएगा तो मोमिन का स्वप्न मुश्किल ही से झूठा निकलेगा। तथा मोमिन का स्वप्न नबुव्वत (ईशदौत्य) के छयालीस भागों में से एक भाग है।
जब आदम की संतान सुबह करती है, तो उसके शरीर के सारे अंग ज़बान से विनम्रतापूर्वक कहते हैंः हमारे बारे में अल्लाह से डर। हम तो तुझसे ही संबद्ध हैं; तू सीधी रही, तो हम सीधे रहेंगे और तू टेढ़ी हो गई तो हम भी टेढ़े हो जाएँगे।
बंदा अल्लाह तआला को प्रसन्न करने वाली कोई बात करता है और उसे कोई महत्व नहीं देता, परन्तु उसके कारण अल्लाह उसकी श्रेणियों को बढ़ा देता है। इसी तरह, बंदा अल्लाह तआला को नाराज़ करने वाली कोई बात करता है और उसे कोई महत्व नहीं देता, परन्तु उसके कारण जहन्नम में गिर जाता है।
लोगों में अल्लाह से सबसे निकट वह व्यक्ति है, जो उन्हें सलाम करने में पहल करे
सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो
एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आने की अनुमति माँगी, तो फ़रमायाः उसे आने दो, वह अपने क़बीले का बहुत बुरा व्यक्ति है
हम दूध में से अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का हिस्सा उठाकर रख लेते थे। आप रात को आते और धीरे से सलाम करते ताकि सोने वाला तो न जागे, परन्तु जागने वाला सुन ले।
एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम लो, तुम्हारे खाने में बरकत दी जाएगी।
दो खुजूरों को एक साथ मुँह में न डालो, क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो खुजूरों को एक साथ मुँह में डालने से मना किया है। फिर कहने लगेः हाँ, यदि साथ में खाने वाला अपने भाई को अनुमति दे दे तो कोई बात नहीं है।
यह व्यक्ति हमारे पीछे-पीछे आ गया है। तुम उसे अनुमति दो तो ठीक है, वरना वापस हो जाएगा। उसने कहाः अल्लाह के रसूल! बल्कि मैं उसे अनुमति देता हूँ।
मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि तीन उँगलियों से खाना खा रहे थे। जब खाना खा चुके तो उँगलियों को चाट लिया।
मैंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ज़मज़म का पानी पिलाया और आपने खड़े-खड़े पी लिया।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हम लोग चलते-फिरते खा लेते थे और खड़े होकर पी लेते थे।
जब तुम तीन व्यक्ति एक साथ रहो, तो दो लोग अलग से कानाफूसी न करें, यहाँ तक कि तुम अन्य लोगों से घुल-मिल जाओ।
कोई आदमी दूसरे आदमी को उसके स्थान से उठाकर न बैठे। बल्कि (अपने भाई के लिए) जगह बनाओ और गुंजाइश पैदा करो।
जब लोग समूह में जा रहे हों, तो यह काफ़ी है कि उनकी ओर से उनमें से एक आदमी सलाम करे तथा यह भी काफ़ी है कि समूह की ओर से एक व्यक्ति सलाम का उत्तर दे।
जिसने अल्लाह के लिए विनम्रता दिखाते हुए ऐसा वस्त्र पहनने से गुरेज़ किया, जिसे पहनने की वह शक्ति रखता है, अल्लाह क़यामत के दिन उसे सारी सृष्टियों के सामने बुलाएगा और अख़्तियार देगा कि ईमान का जो जोड़ा वह पहनने चाहे, पहन ले।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मशक या घड़े में मुँह लगाकर पानी पीने से मना किया है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मशकों का मुँह मोड़कर उनसे पानी पीने से मना किया है।
मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास से गुजरा। उस समय मेरी लुँगी ढ़ीली होकर नीचे लटक चुकी थी। अतः, आपने फ़रमायाः ऐ अब्दुल्लाह, अपनी लुँगी ऊपर उठाओ। मैंने उसे ऊपर उठाया, तो आपने फिर फ़रमायाः और उठाओ। चुनांचे मैंने और उठा लिया। उसके पश्चात मैं सर्वदा इसका ध्यान रखता हूँ। किसी ने पूछा कि आपको कहाँ तक लुँगी उठाने का आदेश मिला था? तो कहाः आधी पिंडलियों तक।
जब कोई मुसलमान अपने बीमार भाई का हाल जानने जाता है, तो वापस लौटने तक वह जन्नत के फलों को चुनने में लगा होता है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास कोई पीने की वस्तु लाई गई, तो आपने उसमें से पिया। उस समय आपकी दाएँ ओर एक बालक था।
तुममें से कोई हरगिज़ मृत्यु की तमन्ना न करे। यदि वह नेक है, तो संभव है कि वह और नेकियाँ करे। और यदि गुनहगार है, तो संभव है कि तौबा कर ले।
मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचा, तो उस समय आप ख़ुतबा दे रहे थे।
“निश्चय ही क़ुरान वाले का उदाहरण रस्सी से बंधे हुए ऊँटों के मालिक के समान है। यदि वह उनकी ठीक से देखभाल करेगा, तो उन्हें अपने पास रखने में सफल होगा और अगर उन्हें छोड़ देगा, तो वे भाग खड़े होंगे।”
वह कुछ बच्चों के पास से गुज़रे, तो उनको सलाम किया और कहा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ऐसा किया करते थे।
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति को किसी की प्रशंसा करते हुए सुना, जो उसकी प्रशंसा करने में अतिश्योक्ति कर रहा था, तो आपने फरमायाः "तुमने उसे हलाक कर दिया।" अथवा "तुमने उसकी पीठ काट दी।"
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस बात से मना फ़रमाया कि शत्रु की धरती की ओर क़ुरआन लेकर सफ़र किया जाए।
हम लोग किसी सफ़र में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे कि इसी बीच एक व्यक्ति सवार होकर आया।
ऐ अबुल हसन! अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने किस अवस्था में सुब्ह की? तो उन्होंने उत्तर दियाः अल-हमदुलिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है) आपने स्वस्थ होकर सुब्ह की है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी यात्रा पर निकलते तो यात्रा की कठिनाई, अप्रिय वापसी, बनाव के बाद बिगाड़, मज़लूम की बद्दुआ और परिवार तथा धन-माल में बुरी दृष्टि से अल्लाह की शरण माँगते थे।
एक (अकेला) सवार शैतान है, दो सवार शैतान हैं और तीन सवार क़ाफ़िला हैं।
जब तुम हरियाली के दिनों में यात्रा करो तो ऊँट को धरती में चरने का उसका हक़ प्रदान करो और जब सुखाड़ के दिनों में यात्रा करो तो उसपर सवार होकर तेज़-तेज़ चलो तथा उसकी शक्ति ख़त्म होने से पहले मंज़िल तक पहुँच जाओ।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब यात्रा में होते और रात को ठहरते तो दाएँ करवट पर लेटते और जब सुब्ह से कुछ पहले ठहरते तो अपना दाहिना बाज़ू खड़ा कर लेते और अपना सर अपनी हथेली पर रख लेते।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) यात्रा में सबसे पीछे चलते तथा कमज़ोर को हाँकते, उसे अपने पीछे सवार कर लेते और उसके लिए दुआ करते।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सफ़र में निकलते समय अपने ऊँट पर ठीक से बैठ जाते तो तीन बार 'अल्लाहु अकबर' कहते और फिर फ़रमातेः «سبحان الذي سخَّر لنا هذا وما كنا له مُقْرِنِينَ وإنا إلى ربنا لـمُنْقَلِبُون» "पाक है वह हस्ती, जिसने इस जानवर को हमारे वश में कर दिया, अन्यथा हम उसे अपने क़ाबू में करने में सक्षम नहीं थे तथा निश्चय ही हम अपने रब की ओर लौटकर जाने वाले हैं।
ऐ मुहाजिरो और अंसारियो! तुम्हारे कुछ भाई ऐसे हैं, जो न धन रखते हैं न कुनबा। अतः, तुममें से हर व्यक्ति अपने साथ दो या तीन लोगों को मिला ले।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सोने का इरादा करते तो अपना दायाँ हाथ अपने गाल के नीचे रख लेते, फिर कहतेः اللَّهُمَّ قِني عذابك يوم تبعث عبادك" अर्थात, ऐ अल्लाह! मुझे उस दिन अपने अज़ाब से बचाना, जिस दिन तू अपने बंदों को जीवित करके उठाएगा।
जब हम किसी ऊँचे स्थान पर चढ़ते , तो अल्लाहु अकबर कहते और जब ढलान पर आते तो सुबहानल्लाह कहा करते थे
ऐ लोगो! स्वंय अपने आप पर दया करो। तुम किसी बहरे तथा ग़ायब को नहीं बुला रहे हो, वह तुम्हारे साथ है और वह बहुत ही सुनने वाला और समीप है
जब कोई मुस्लिम प्रातः किसी बीमार मुस्लिम की इयादत (कुशल- मंगल लेना) करता है, तो सत्तर हज़ार फ़रिश्ते उस के लिए रहमत की प्रार्थना करते हैं
जिसने ऐसा ज्ञान प्राप्त किया, जिससे अल्लाह की खुशी प्राप्त की जाती है
सबसे बड़ा झूट यह है कि इनसान अपनी आँखों को ऐसी चीज़ दिखाए, जो उन्होंने न देखी हों।
तुम एक-दूसरे के लिए न अल्लाह की लानत की बददुआ करो, न उसके क्रोध की बददुआ करो और न जहन्नम की बददुआ करो।
दो गाली देने वालों की गाली की लानत, आरंभ करने वाले पर होगी, जब तक कि पीड़ित आत्याचार न करे
बर्तनों को ढाँप दो, मशक़ीज़ों के मुख बांध दो और दरवाज़े बंद कर दो तथा चिराग़ बुझा दो, क्योंकि शैतान मशकीज़ों के बंधन खोल नहीं सकता और न ही दरवाज़े खोल सकता है और न बर्तन का ढक्कन हटा सकता है
ऐ लोगो! जिसे किसी बात का ज्ञान हो वह उस बात को कहे और जिसे ज्ञान न हो वह कहे: अल्लाह ही अधिक जानता है, क्योंकि जिसे नहीं जानता उसके बारे में यह कहना कि अल्लाह अधिक जानता है, यह भी ज्ञान है
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आदमी को खड़े होकर जूता पहनने से मना फ़रमाया है
बुख़ार को गाली मत दो, क्योंकि वह आदम की संतान के पापों को उसी प्रकार ख़त्म कर देता है, जैसे लोहार की धौंकनी लोहे के ज़ंग को ख़त्म कर देती है
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (खाने के बाद) उँगलियों तथा प्लेट को चाट लेने का आदेश दिया है तथा फ़रमाया है: तुम नहीं जानते कि भोजन के किस अंश में बरकत है।
तुम्हारे यहाँ रोज़ेदार इफ़तार किया करें, तुम्हारा खाना नेक लोग खाएँ और फ़रिश्ते तुम्हारे लिए दुआ करें
अल्लाह ज्ञान को लोगों से छीनकर नहीं उठाएगा, बल्कि वह ज्ञान को बंदों से उलेमा को मौत देकर उठाएगा
फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो और फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो,जब नमाज़ का समय हो जाए तो तुम में से एक व्यक्ति अज़ान दे तथा तुम में से जो क़ुरआन का सबसे ज़्यादा याद रखता हो वह इमामत करे।
सबसे बुरा खाना वलीमे का वह खाना है, जिसमें धनवानों को बुलाया जाए और निर्धनों को छोड़ दिया जाए और जिसने दावत छोड़ दी, उसने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की नाफ़रमानी की।
जब तुममें से किसी को (वलीमे की दावत में) बुलाया जाए, तो वह दावत क़बूल करे। अगर रोज़ेदार हो, तो दुआ दे और अगर रोज़े से न हो, तो खाए।
सुनो! तुममें से हर कोई अपने रब से मुनाजात (सरगोशी) कर रहा है, इसलिए कोई किसी को तकलीफ़ न पहुँचाए
अपने कपड़ों में से सफ़ेद कपड़े पहना करो। ये तुम्हारे सबसे अच्छे कपड़ों में से हैं। तथा इन्हीं में अपने मुर्दों को दफ़न किया करो।
उसपर लानत न भेजो, अल्लाह की क़सम! मुझे मालूम है कि वह अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है।
मैंने अपने मन में सोचा कि आज मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का द्वारपाल बनने का सौभाग्य प्राप्त करूँगा। इतने में अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) आए और दरवाज़ा खटखटाया। मैंने कहाः कौन हैं? तो फ़रमायाः अबू बक्र। मैंने कहाः तनिक रुकिए। फिर मैं आपके पास गया और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) अनुमति माँग रहे हैं। आपने फ़रमायाः "उन्हें अनुमति दो तथा जन्नत की शुभ सूचना भी दो।"
ऐ अबू बत्न, हम केवल शांति स्थापित करने के लिए जाते हैं और इसी लिए हर मिलने वाले को सलाम करते हैं।
शैतान आदम की संतान की रगों में लहू की तरह दौड़ता है। इसलिए मुझे डर हुआ कि शैतान तुम्हारे दिलों में कोई गलत ख़्याल न डाल दे।
तुम्हारा इन घाटियों और वादियों में अलग-अलग फैल जाना शैतान की ओर से है।
मैं अनस बिन मालिक -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- के साथ कुछ मजूसियों के पास बैठा हुआ था कि चाँदी के एक बर्तन में फालूदा लाया गया, तो उन्होंने नहीं खाया।
हम रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की अगवानी के लिए बच्चों के साथ सनिय्यतुल वदा तक गए।
क्या तुममें से किसी ने कोई सपना देखा है? फिर अल्लाह जिसे चाहता, वह आपके सामने अपने स्वप्न बयान करता। एक दिन सुबह के समय आपने हमसे कहा : आज रात मेरे पास दो व्यक्ति (फ़रिश्ते) आए और बोले : चलो। चुनांचे मैं उनके साथ चल पड़ा।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें सूचित किया है कि क्या हो चुका है और क्या होगा। अब हममें अधिक जानकार है जो उन बातों को सबसे अधिक याद रखता है
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए चमड़े के बर्तन में किशमिश की नबीज़ बनाई जाती थी, जिसे आप उस दिन तथा दूसरे और तीसरे दिन पीते थे। जब तीसरे दिन की शाम होती खुद पीते और अन्य लोगों को पिला देते। फिर भी अगर कुछ बच जाता, तो बहा देते थे।
जब तुममें से कोई छींके, तो 'अल-हम्दु लिल्लाह' (सारी प्रशंसा अल्लाह की हैं) कहे और उसका भाई अथवा उसका साथी 'यरहमुकल्लाह' (अल्लाह तुझपर दया करे) कहे। फिर जब उसका साथी 'यरहमुकल्लाह' कहे, तो वह 'यहदीकुमुल्लाह व युसलिहु बालकुम' (अल्लाह तुम्हें हिदायत दे और तुम्हारा हाल सही कर दे) कहे।
ऐ लोगों के रब (पालनहार), तकलीफों तथा रोगों को दूर करने वाले, रोग से मुक्ति प्रदान कर। तेरे सिवा कोई शिफा देने वाला नहीं है। रोग से ऐसा छुटकारा प्रदान कर कि फिर कोई रोग शेष न रहे।
एक व्यक्ति अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और कहा : 'अस्सलामु अलैकुम' (आपपर शांति अवतरित हो)। आपने उसके सलाम का उत्तर दिया और वह बैठ गया। फिर आपने कहा : "इसके लिए दस नेकियाँ लिखी गईं।
किसी मुसलमान औरत के लिए जायज़ नहीं कि एक दिन एवं एक रात की यात्रा किसी महरम के बिना करे।
मुसलमान का तहबंद आधी पिंडली तक होना चाहिए और यदि आधी पिंडली एवं टखने के बीच हो, तो भी कोई हर्ज (अथवा गुनाह) नहीं है। हाँ, जो दोनों टखनों से नीचे होगा, वह जहन्नम में होगा, तथा जो अपना तहबंद अभिमान के तौर पर लटकाएगा, अल्लाह उसपर अपनी नज़र नहीं डालेगा।
जब तुममें से किसी को जमाही आए, तो अपना हाथ मुँह पर रखकर उसे रोके। क्योंकि शैतान अंदर दाख़िल हो जाता है।
एक मुसलमन के दूसरे मुसलमान पर छह अधिकार हैं।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! वो क्या हैं? फ़रमाया : "जब उससे मिलो तो सलाम करो, जब वह आमंत्रण दे तो उसका आमंत्रण स्वीकार करो, जब तुमसे शुभचिंतन की आशा रखे तो उसका शुभचिंतक बनो, जब छींकने के बाद अल्लाह की प्रशंसा करे तो 'यरहमुकल्लाह' कहो, जब बीमार हो तो उसका हाल जानने जाओ और जब मर जाए तो उसके जनाज़े में शामिल हो।
अल्लाह उस व्यक्ति की ओर नहीं देखेगा, जो अभिमान के कारण अपना कपड़ा लटकाकर चलता हो।
कष्ट दूर कर दे ऐ लोगों के रब! तथा रोग से मुक्ति प्रदान कर, तू ही रोग से मुक्ति प्रदान करने वाला है। तेरे सिवा कोई रोग से मुक्ति प्रदान करने वाला नहीं है। रोग से ऐसा छुटकारा प्रदान कर कि फिर कोई रोग शेष न रहे।
क़सम सामान को मार्केट में चलाने का माध्यम तो है, लेकिन कमाई की बरकत ख़त्म कर देती है।
जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, तो उनके अलग होने से पहले-पहले उनको क्षमा कर दिया जाता है।
अल्लाह उस व्यक्ति को ख़ुश व आबाद रखे, जिसने मुझसे कोई बात सुनी और उसे उसी प्रकार दूसरों तक पहुँचा दिया, जिस प्रकार मुझसे सुनी थी। क्योंकि बहुत बार सुनने वाले से वह व्यक्ति अधिक याद रखता है (या अधिक समझदार होता है) जिस तक बात पहुँचाई गई हो।
जिस व्यक्ति ने अपने भाई से 'ऐ काफ़िर' कहा, उसके द्वारा प्रयोग किए गए इस शब्द का हक़दार उन दोनों में से एक बन गया। अगर उसकी बात सही है, तो ठीक है। अगर सही नहीं है, तो उसकी कही हुई बात उसी की ओर लौट आएगी।
सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने कहा है : "आदम की संतान मुझे कष्ट देती है। वह ज़माने को गाली देती है। जबकि मैं ही ज़माने (का मालिक) हूँ। मामला मेरे हाथ में है, मैं ही रात और दिन को पलटता हूँ।