खाने-पीने के आदाब

35हदीसों की सूची

हदीसों की सूची 35

निश्चय अल्लाह बंदे की इस बात से खुश होता है कि बंदा कुछ खाए तो उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और कुछ पिए तो उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे।
बच्चे, बिस्मिल्लाह पढ़ लिया करो, दाहिने हाथ से खाया करो और अपने सामने से खाया करो।
जब तुममें से कोई खाना खाए, तो अपने दाएँ हाथ से खाए और तुममें से कोई कुछ पिए तो अपने दाएँ हाथ से पिए। क्योंकि शैतान अपने बाएँ हाथ से खाता और बाएँ हाथ से पीता है।
तुममें से कोई व्यक्ति पेशाब करते समय अपने लिंग को दाएँ हाथ से न पकड़े तथा दाएँ हाथ से इस्तिंजा (पेशाब-पाखाना से पवित्रता प्राप्त) न करे एवं कुछ पीते समय बरतन में साँस न ले।
एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास बाएँ हाथ से खाना खाया, तो आपने कहा : "दाएँ हाथ से खा।" वह बोला : मैं इसकी ताक़त नहीं रखता। चुनांचे आपने फरमाया : "तूझे इसकी ताक़त न हो
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कभी किसी खाने में ऐब नहीं निकाला। यदि इच्छा हुई, तो खाया और यदि इच्छा नहीं हुई, तो छोड़ दिया।
जब तुम में से कोई खाना खा चुके, तो अपना हाथ चाटे अथवा चटवाए बिना साफ़ किए।
शराब हराम की गई, वह पाँच वस्तुओं से बनती थीः अंगूर, खजूर, मधु, गेहूँ और जौ से।
जब खाते समय अल्लाह का नाम न लिया जाए तो उस खाने में शैतान शामिल हो जाता है। वही इस बच्ची को लाया था, ताकि इसके माध्यम से खाने में शरीक हो जाए। अतः, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। फिर इस देहाती को ले आया ताकि उसके बहाने शरीक हो जाए, परन्तु मैंने उसका हाथ भी पकड़ लिया। उस अल्लाह की क़सम! जिसके हाथ में मेरे प्राण हैं, शैतान का हाथ इन दोनों के हाथों के साथ मेरे हाथ में है।
एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम लो, तुम्हारे खाने में बरकत दी जाएगी।
दो खुजूरों को एक साथ मुँह में न डालो, क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो खुजूरों को एक साथ मुँह में डालने से मना किया है। फिर कहने लगेः हाँ, यदि साथ में खाने वाला अपने भाई को अनुमति दे दे तो कोई बात नहीं है।
यह व्यक्ति हमारे पीछे-पीछे आ गया है। तुम उसे अनुमति दो तो ठीक है, वरना वापस हो जाएगा। उसने कहाः अल्लाह के रसूल! बल्कि मैं उसे अनुमति देता हूँ।
मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि तीन उँगलियों से खाना खा रहे थे। जब खाना खा चुके तो उँगलियों को चाट लिया।
मैंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ज़मज़म का पानी पिलाया और आपने खड़े-खड़े पी लिया।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हम लोग चलते-फिरते खा लेते थे और खड़े होकर पी लेते थे।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मशक या घड़े में मुँह लगाकर पानी पीने से मना किया है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मशकों का मुँह मोड़कर उनसे पानी पीने से मना किया है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास कोई पीने की वस्तु लाई गई, तो आपने उसमें से पिया। उस समय आपकी दाएँ ओर एक बालक था।
बर्तनों को ढाँप दो, मशक़ीज़ों के मुख बांध दो और दरवाज़े बंद कर दो तथा चिराग़ बुझा दो, क्योंकि शैतान मशकीज़ों के बंधन खोल नहीं सकता और न ही दरवाज़े खोल सकता है और न बर्तन का ढक्कन हटा सकता है
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (खाने के बाद) उँगलियों तथा प्लेट को चाट लेने का आदेश दिया है तथा फ़रमाया है: तुम नहीं जानते कि भोजन के किस अंश में बरकत है।
सबसे बुरा खाना वलीमे का वह खाना है, जिसमें धनवानों को बुलाया जाए और निर्धनों को छोड़ दिया जाए और जिसने दावत छोड़ दी, उसने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की नाफ़रमानी की।
मैं अनस बिन मालिक -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- के साथ कुछ मजूसियों के पास बैठा हुआ था कि चाँदी के एक बर्तन में फालूदा लाया गया, तो उन्होंने नहीं खाया।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए चमड़े के बर्तन में किशमिश की नबीज़ बनाई जाती थी, जिसे आप उस दिन तथा दूसरे और तीसरे दिन पीते थे। जब तीसरे दिन की शाम होती खुद पीते और अन्य लोगों को पिला देते। फिर भी अगर कुछ बच जाता, तो बहा देते थे।