عن أنس بن مالك -رضي الله عنه- مرفوعاً: «إن الله ليرضى عن العبد أن يأكل الأكلة، فيحمده عليها، أو يشرب الشَّربة، فيحمده عليها».
[صحيح] - [رواه مسلم]
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अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "निश्चय अल्लाह बंदे की इस बात से खुश होता है कि बंदा कुछ खाए तो उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और कुछ पिए तो उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे।"
सह़ीह़ - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

अल्लाह की प्रन्नता की प्राप्ति के साधनों में से एक यह है कि बंदा जो कुछ खाए तथा पिए उसपर अल्लाह का शुक्र अदा करे, क्योंकि वही यह सारी चीज़ें प्रदान करता है।

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फ़ायदे

  1. अल्लाह के राज़ी होने के गुण का प्रमाण।
  2. अल्लाह की प्रसन्नता मामूली चीज़ों, जैसे खाने-पीने के बाद उसकी प्रशंसा के ज़रिए भी प्राप्त की जा सकती है।
  3. सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह का शुक्र अदा करने की प्रेरणा तथा यह कि अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति का सबब है। इसी तरह शुक्र मुक्ति तथा ग्रहण का मार्ग है।
  4. खाने-पीने के एक अदब का बयान।
  5. सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह की दयालुता का बयान, जो इनसान को रोज़ी भी देता है और उसकी प्रशंसा से प्रसन्न भी होता है।
  6. "अल-हम्दु लिल्लाह" कहने से सुन्नत पर अमल हो जाता है।
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