عن عائشة رضي الله عنها قالت: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:
«إنَّ المُؤْمِنَ ليُدرِكُ بِحُسْنِ خُلُقِهِ دَرَجَةَ الصَّائِمِ القَائِمِ».

[صحيح بشواهده] - [رواه أبو داود وأحمد] - [سنن أبي داود: 4798]
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आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सूना :
"मोमिन अपने अच्छे आचरण के कारण रोज़ेदार और तहज्जुद गुज़ार का दर्जा प्राप्त कर लेता है।"

[शवाहिद के आधार पर स़ह़ीह़] - [इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया है] - [सुनन अबू दावूद - 4798]

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि अच्छा आचरण इन्सान को निरंतर रूप से रोज़ा रखने वाले और तहज्जुद पढ़ने वाले व्यक्ति के स्थान पर लाकर खड़ा कर देता है। याद रहे कि अच्छा आचरण नाम है, भला करने, अच्छी बात कहने, हँसकर मिलने, किसी को कष्ट न देने और कोई कष्ट दे, तो सब्र करने का।

हदीस का संदेश

  1. इस्लाम ने मानव आचरण को विशुद्ध एवं संपूर्ण बनाने पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया है।
  2. अच्छे आचरण का महत्व इतना है कि इन्सान इसके ज़रिए निरंतर रूप से रोज़ा रखने और बिना थके तहज्जुद पढ़ने वाले का स्थान प्राप्त कर लेता है।
  3. दिन में रोज़ा रखना और रात में तहज्जुद पढ़ना, दोनों बड़े-बड़े अमल हैं और दोनों को करते समय इन्सान को कष्ट होता है। लेकिन अच्छे आचरण वाला इन्सान इनका स्थान इसलिए प्राप्त कर लेता है कि इसके लिए इन्सान को अपने आपसे लड़ना पड़ता है।
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