عن عائشة -رضي الله عنها- قالت: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «أَبْغَضُ الرِّجَالِ إِلى اللهِ الأَلَدُّ الخَصِمُ».
[صحيح] - [متفق عليه]
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आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः ”अल्लाह के पास सबसे घृणित व्यक्ति वह है, जो अत्यधिक झगड़ालू तथा हमेशा विवाद में रहने वाला हो।”
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

अल्लाह तआला बहुत ज़्यादा और हमेशा झगड़ने वाले ऐसे व्यक्ति से घृणा करता है जो सत्य के स्वीकार करने पर आमादा नहीं होता।

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फ़ायदे

  1. अल्लाह तआला बहुत ज़्यादा झगड़ने और बहस करने वाले व्यक्ति से घृणा करता है।
  2. जो उत्पीड़ित व्यक्ति अपने अधिकार के लिए शरई तरीक़े से और वाद-विवाद के वैधानिक सिद्धांतों के अनुसार बहस करता हो, उसकी बहस गलत नहीं है, और वह निंदित वाद-विवादों के अंदर दाख़िल नहीं होगी।
  3. इनसान यदि किसी से वाद-विवाद करे, तो उसके पास अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए कोई प्रमाण होना चाहिए और उसे बहुत ज़्यादा उलझना भी नहीं चाहिए।
  4. "अल्लाह के निकट सबसे घृणित आदमी" आपने आदमी शब्द का प्रयोग अधिकता के तौर पर किया है, वरना स्त्रियाँ भी इस हुक्म में पुरुषों के समान हैं।
  5. जो व्यक्ति सत्य पर रहते हुए किसी से वाद-विवाद करे और उसे प्रास्त कर दे, उसका वाद-विवाद करना उचित है और ऐसा व्यक्ति अल्लाह के निकट घृणित नहीं, बल्कि प्रिय है।
  6. इस हदीस में अल्लाह की घृणा की विशेषता को सिद्ध किया गया है, जो अल्लाह के प्रताप और पराक्रम के अनुसार उसके लिए साबित होगी।
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