عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«إِنَّمَا مَثَلُ صَاحِبِ القُرْآنِ كَمَثَلِ صَاحِبِ الإِبِلِ المُعَقَّلَةِ، إِنْ عَاهَدَ عَلَيْهَا أَمْسَكَهَا، وَإِنْ أَطْلَقَهَا ذَهَبَتْ».
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 5031]
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अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
“निश्चय ही क़ुरान वाले का उदाहरण रस्सी से बंधे हुए ऊँटों के मालिक के समान है। यदि वह उनकी ठीक से देखभाल करेगा, तो उन्हें अपने पास रखने में सफल होगा और अगर उन्हें छोड़ देगा, तो वे भाग खड़े होंगे।”
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 5031]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़ुरआन पढ़ने और उसकी तिलावत करने वाले -तिलावत चाहे मुसहफ़ को देखकर करे या याद होने के कारण ज़ुबानी- को ऐसे व्यक्ति के समान बताया है, जिसने रस्सी से ऊँट बाँध रखा हो। अगर वो उसकी देखभाल करता रहेगा, जो ऊँट को अपने पास रखे रहने में सफल रहेगा और अगर रस्सी खोल देगा, तो ऊँट भाग जाएगा। इसी तरह क़ुरआन पढ़ने वाला जब उसे पढ़ता रहेगा, तो याद रखने में सफल रहेगा और जब पढ़ना बंद कर देगा, तो भूल बैठेगा। मतलब यह कि जब तक देखभाल है, तो सुरक्षा है।