عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضيَ اللهُ عنهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«إِذَا انْتَهَى أَحَدُكُمْ إِلَى الْمَجْلِسِ فَلْيُسَلِّمْ، فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَقُومَ فَلْيُسَلِّمْ، فَلَيْسَتِ الْأُولَى بِأَحَقَّ مِنَ الْآخِرَةِ».
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"जब तुममें से कोई सभा में आए, तो सलाम करे और जब सभा से निकलना चाहे तो सलाम करे, क्योंकि पहला सलाम दूसरे से अधिक हक़दार नहीं है।"