عن أبي هريرة -رضي الله عنه- قال: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «مَنْ عَادَ مَرِيضًا أَو زَارَ أَخًا لَهُ فِي الله، نَادَاهُ مُنَادٍ: بِأَنْ طِبْتَ، وَطَابَ مَمْشَاكَ، وَتَبَوَّأتَ مِنَ الجَنَّةِ مَنْزِلاً».
[حسن.] - [رواه الترمذي وابن ماجه وأحمد.]
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अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जो किसी बीमार व्यक्ति का हाल जानने जाता है या अपने किसी भाई से अल्लाह के लिए मिलने जाता है, तो एक पुकारने वाला उसे यह कहकर पुकारता है कि तुझे मुबारक हो, तेरा चलकर जाना मुबारक हो और तुझे जन्नत में ठिकाना नसीब हो।"
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व्याख्या

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