عن ابن عمر -رضي الله عنهما- قال: قال النبي -صلى الله عليه وسلم-: «أَفْرَى الفِرَى أن يُرِيَ الرجل عينيه ما لم تَرَيَا».
[صحيح.] - [رواه البخاري.]
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इब्ने उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि रसूलुल्लाह -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमाया : "सबसे बड़ा झूट यह है कि इनसान अपनी आँखों को ऐसी चीज़ दिखाए, जो उन्होंने न देखी हों।"
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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