عَنْ أَبِي قَتَادَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ مِنَ اللَّهِ، وَالحُلُمُ مِنَ الشَّيْطَانِ، فَإِذَا حَلَمَ أَحَدُكُمْ حُلُمًا يَخَافُهُ فَلْيَبْصُقْ عَنْ يَسَارِهِ، وَلْيَتَعَوَّذْ بِاللَّهِ مِنْ شَرِّهَا، فَإِنَّهَا لاَ تَضُرُّهُ».
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 3292]
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अबू क़तादा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"अच्छा सपना अल्लाह की ओर से है और बुरा सपना शैतान की ओर से। अतः जब तुम में से कोई व्यक्ति डरावना सपना देखे, तो तीन बार बाएँ ओर थुत्कारे और उस सपने की बुराई से अल्लाह की शरण माँगे,(ऐसा करने से) यह उसकी हानि नहीं करेगा।"
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 3292]
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया कि अच्छा और ख़ुशी देने वाला स्वप्न अल्लाह की ओर से है। जबकि अप्रिय एवं चिंतित करने वाला स्वप्न शैतान की ओर से है।
अतः जो व्यक्ति अप्रिय स्वप्न देखे, वह बाईं ओर थुत्कारे और उसकी बुराई से अल्लाह की शरण माँगे। क्योंकि अल्लाह ने उक्त कार्य को बुरे स्वप्न के नतीजे में सामने आने वाली अप्रिय घटना से सुरक्षा का साधन बनाया है।