عن عُقْبَة بن عامر -رضي الله عنه- قال: قلت: يا رسول الله ما النَّجَاة؟ قال: «أَمْسِكْ عليك لِسَانَكَ، وَلْيَسَعْكَ بَيتُك، وابْكِ على خَطِيئَتِكَ».
[صحيح] - [رواه الترمذي وأحمد.]
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उक़बा बिन आमिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- वर्णन करते हैं कि मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मुक्ति क्या है? फ़रमायाः "अपनी ज़बान को नियंत्रण में रखो, अपने घर ही में रहा करो और अपने गुनाह पर रो लिया करो।"
सह़ीह़ - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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