عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ رضي الله عنه قَالَ:
قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللهِ مَا النَّجَاةُ؟ قَالَ: «امْلِكْ عَلَيْكَ لِسَانَكَ، وَلْيَسَعْكَ بَيْتُكَ، وَابْكِ عَلَى خَطِيئَتِكَ».
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उक़बा बिन आमिर जुहनी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं :
मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो।"