عَنِ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ:
أَمَرَنَا رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِسَبْعٍ، وَنَهَانَا عَنْ سَبْعٍ: أَمَرَنَا بِعِيَادَةِ الْمَرِيضِ، وَاتِّبَاعِ الْجَنَازَةِ، وَتَشْمِيتِ الْعَاطِسِ، وَإِبْرَارِ الْقَسَمِ، أَوِ الْمُقْسِمِ، وَنَصْرِ الْمَظْلُومِ، وَإِجَابَةِ الدَّاعِي، وَإِفْشَاءِ السَّلَامِ، وَنَهَانَا عَنْ خَوَاتِيمَ -أَوْ عَنْ تَخَتُّمٍ- بِالذَّهَبِ، وَعَنْ شُرْبٍ بِالْفِضَّةِ، وَعَنِ الْمَيَاثِرِ، وَعَنِ الْقَسِّيِّ، وَعَنْ لُبْسِ الْحَرِيرِ وَالْإِسْتَبْرَقِ وَالدِّيبَاجِ.
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح مسلم: 2066]
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बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं :
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें सात बातों का आदेश दिया है और सात जीचों से रोका है। हमें आदेश दिया है: रोगी का हाल जानने के लिए जाने का, जनाज़ा के पीछे चलने का, छींकने वाले का उत्तर देना का, क़सम पूरी करने में या क़सम खाने वाले की क़सम पूरी करने में सहयोग करना का, अत्याचार से पीड़ित व्यक्ति की सहायता करने का, निमंत्रण देने वाले का निमंत्रण स्वीकार करने का और सलाम को आम करने का। तथा हमें रोका है सोने की अंगूठी से, चाँदी के बरतन में पीने से, रेशमी ज़ीनपोश (मलमल के बिछौने) के इस्तेमाल और मिस्र के क़स्स नामी गाँव के बने हुए रेशमी वस्त्र, सामान्य रेशमी वस्त्र, मोटे रेशमी वस्त्र एवं बारीक रेशमी वस्त्र के इस्तेमाल से।
[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 2066]
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुसलमानों को सात कामों का आदेश दिया है और सात कामों से रोका है। आपने निम्नलिखित सात कामों का आदेश किया है : 1- बीमार व्यक्ति का हाल-चाल जानने के लिए जाना। 2- जनाज़े के पीछे चलना, मय्यित पर नमाज़े जनाज़ा पढ़ने और उसे दफ़न करने में शामिल होना तथा उसके लिए दुआ करना। 3- जब कोई व्यक्ति छींकने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहे (यानी अल्लाह की प्रशंसा करे), तो उसके लिए यरहमुकल्लाह कहना चाहिए (यानी उसके लिए रहमत की दुआ करना चाहिए)। 4- क़सम खाने वाले को अपनी क़सम पर क़ायम रहने में मदद करना। यानी अगर किसी ने कोई काम करने की क़सम खाई और तुम उसे अपनी क़सम पर क़ायम रहने में मदद कर सकते हो, तो मदद ज़रूर करो, ताकि उसे क़सम का प्रायश्चित न करना पड़े। 4- पीड़ित की मदद करना। यानी उसके साथ खड़े होना और उसे जहाँ तक हो सके, अत्याचार से बचाना। 6- कोई निमंत्रण, जैसे वलीमे या अक़ीक़े आदि का निमंत्रण देने का निमंत्रण स्वीकार करना। 7- सलाम करने और सलाम का उत्तर देने का प्रचलन आम करना। आपने जिन कार्यों से मना किया है, वो इस प्रकार हैं : 1- सोने की अंगोठी तथा ज़ेवर का प्रयोग करना। 2- चाँदी के बर्तन में कुछ पीना। 3- घोड़े की काठी तथा ऊँट के कजावे पर रखे हुए रेशम के गद्दे पर बैठना। 4- रेशम मिश्रित सूत से बना हुआ कपड़ा, जिसे अरबी में 'القَسِّي' कहा जाता है, पहनना। 5- रेशम पहनना। 6- इस्तबरक़ यानी मोटा रेशम पहनना। 7- दीबाज पहनना, जो कि श्रेष्ठतम रेशम है।