عن عبد الله بنِ عمر -رضي الله عنهما- أن عمرَ بْن الخطاب -رضي الله عنه- قال: ((يا رسول الله، أّيَرقُدُ أَحَدُنا وهو جُنُب؟ قال: نعم، إِذَا تَوَضَّأ أَحَدُكُم فَليَرقُد)).
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहुमा) ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई जनाबत (वीर्य पतन से होने वाली नापाकी) की अवस्था में सो सकता है? आपने फ़रमायाः हाँ, जब तुममें से कोई वज़ू कर ले, तो सो सकता है।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछा कि यदि कोई रात के प्रथम भाग में अपनी स्त्री से संभोग कर ले; यद्यपि वीर्य स्खलन न हुआ हो, या उसे स्वप्नदोष हो जाए, तो क्या वह जनाबत की अवस्था में सो सकता है? तो आपने उन्हें इसकी अनुमति दे दी। अलबत्ता बड़ी नापाकी को शरई वुज़ू के द्वारा हलका करना होगा। उसके बाद यदि सोता है, तो कोई बात नहीं है।

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