عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما قال: «لَمَّا قَدِم رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- وأصحابه مكة، فقَال المُشرِكُون: إِنَّه يَقدَمُ عَلَيكُم قَومٌ وَهَنَتهُم حُمَّى يَثرِب، فَأَمَرَهُم النَّبيُّ -صلَّى الله عليه وسلَّم- أن يَرمُلُوا الأَشوَاطَ الثلاَثَة، وأن يَمشُوا ما بَين الرُّكنَين، ولم يَمنَعهُم أَن يَرمُلُوا الأَشوَاطَ كُلَّها: إلاَّ الإِبقَاءُ عَليهِم». المزيد
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है, वह कहते हैंः जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथी मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने साथियों को आदेश दिया कि शुरू के तीन चक्करों में दुलकी चाल से चलें, किन्तु काबा के यमनी रुक्न और हजर-ए- असवद वाले रुक्न के बीच साधारण चाल से चलें। उन्हें सभी चक्करों में दुलकी चाल से चलने का आदेश केवल इसलिए नहीं दिया गया कि उनके साथ आसानी बरती जाए।