हदीसों की सूची 63

इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है
“जिसने हज किया तथा हज के दिनों में बुरी बात एवं बुरे कार्यों से बचा एवं अवज्ञा से दूर रहा, वह उस दिन की तरह लौटेगा, जिस दिन उसकी माँ ने उसे जन्म दिया था।”
ऐसे कोई दिन नहीं हैं, जिनमें नेकी के काम करना अल्लाह के निकट इन (दस) दिनों में नेकी के काम करने से अधिक प्रिय हों।" आपकी मुराद ज़ुल-हिज्जा महीने के शुरू के दस दिन हैं
इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है
लोगों को आदेश दिया गया है कि उनका अंतिम कार्य काबा का तवाफ़ हो। हाँ, मगर माहवारी के दिनों वाली स्त्री के लिए आसानी रखी गई है।
मक्का विजय के बाद हिजरत नहीं रही, लेकिन जिहाद और नीयत बाक़ी हैं। तथा जब जिहाद के लिए निकलने को कहा जाए तो अविलंब निकल पड़ो।
मदीना ईर से लेकर स़ौर तक हरम है। इसमें जो व्यक्ति धर्म के नाम पर कोई नया काम करेगा या इस तरह का काम करने वाले किसी व्यक्ति को शरण देगा, उसपर अल्लाह, फ़रिश्तों एवं सारे लोगों की लानत है। क़यामत के दिन अल्लाह न उसकी तौबा क़बूल करेगा, न फ़िदया।
कोई ऐसा दिन नहीं, जिसमें अल्लाह जहन्नम से उतने बंदों को मुक्त करता हो, जितने बंदों को अरफ़ा के दिन मुक्त करता है।
कोई स्त्री दो दिन की दूरी के सफर पर उस समय तक न निकले, जब तक उसके साथ उसका पति या कोई महरम (ऐसा रिश्तेदार जिसके साथ कभी शादी न हो सकती हो) न हो
मुसलमानों की माता आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) का यह कहना कि उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से जिहाद में निकलने की अनुमति माँगी, तो आपने फ़रमायाः "तुम्हारा जिहाद हज है।"
मेरी इस मस्जिद में पढ़ी गई एक नमाज़ मस्जिद-ए-हराम को छोड़ अन्य मस्जिदों में पढ़ी गई एक हज़ार नमाज़ों से बेहतर है।
जब रमज़ान आए, तो तुम उमरा कर लो। क्योंकि रमज़ान में किया गया उमरा हज के बराबर है।
ऐ अल्लाह के रसूल! हम ज़िहाद को सबसे उत्तम कार्य समझते हैं, तो क्या हम जिहाद न करें? आपने उत्तर दिया : "नहीं! तुम्हारे लिए सबसे उत्तम जिहाद वह हज है, जो हर गुनाह से पाक एवं अल्लाह के निकट ग्रहणयोग्य हो।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दो चितकबरे, सींग वाले मेढ़ों की क़ुरबानी की। दोनों को अपने हाथ से ज़बह किया, बिस्मिल्लाह कहा, अल्लाहु अकबर कहा और अपना पाँव दोनों की गरदनों पर रखा।
जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने सहाबियों को आदेश दिया कि शुरू के तीन चक्करों में दुलकी चाल से चलें, किंतु काबा के यमनी रुक्न और हजर-ए- असवद वाले रुक्न के बीच साधारण चाल से चलें
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हज्जतुल वदा के अवसर पर ऊँट पर सवार होकर तवाफ़ किया। आप मुड़े हुए किनारे वाली छड़ी से हजरे असवद को छू रहे थे।
मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को, काबा के दो यमनी रुक्नों के अतिरिक्त किसी और भाग को छूते हुए नहीं देखा।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मिना आए, तो जमरा पहुँचकर कंकड़ी मारी, फिर मिना में अपने ठहरने के स्थान पर आए और क़ुरबानी की तथा सर के बाल मूँड़ने वाले से कहाः "सर के बाल मूँड़ दो।" साथ ही आपने पहले सर के दाएँ भाग की ओर इशारा किया और फिर बाएँ भाग की ओर इशारा किया। फिर मुँड़े हुए बाल लोगों को देने लगे।
मुझे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आदेश दिया कि मैं आपकी कुरबानी के जानवरों की देखरेख करूँ तथा उनके मांस, खालों (चमड़ों) और झूलों को सदक़ा कर दूँ और कसाई को उनमें से कुछ भी न दूँ।
अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब ने रसूलुल्लाह- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से मिना में ठरहने के दिनों में हाजियों को पानी पिलाने के लिए मक्का में रात बिताने की अनुमति माँगी, तो आपने अनुमति दे दी।
रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक बार हरम- मक्का- में कुर्बानी के लिए बकरी भेजी।
मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की कुरबानी के लिए अपने हाथों से हार तैयार किए, फिर हदी के जानवरों पर निशान लगाए और आपने उन्हें हार पहनाए- अथवा मैंने हार पहनाए-, फिर उन्हें काबा की ओर भेज दिया और खुद मदीना में ही रहे। इससे आप पर कोई चीज़ हराम नहीं हुई, जो पहले हलाल थी।
अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक व्यक्ति को कुरबानी का ऊँट हाँककर ले जाते देखा, तो कहा कि उसपर सवार हो जा। उसने कहाः यह तो कुरबानी का जानवर है। आप ने कहाः सवार हो जा।
एक व्यक्ति अरफ़ा में ठहरा हुआ था कि अचानक अपने ऊँट से गिर पड़ा और उस की गरदन टूट गई। अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कहाः "इसे पानी और बेर के पत्तों से स्नान कराओ और उसे उसीके दो कपड़ों का कफ़न पहना दो। उसे न खुशबू लगाओ और न उसका सिर ढाँपो। क्योंकि उसे क़यामत के दिन इस हाल में उठाया जाएगा कि वह 'तलबिया' कह रहा होगा।"
अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- काबे को बाएँ और मिना को दाएँ करके खड़े हुए और फ़रमायाः यही वह स्थान है, जहाँ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर सूरा अल-बक़रा उतरी थी।
मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अरफ़ात में प्रवचन देने के दौरान (एहराम वाले व्यक्ति के बारे में) कहते हुए सुनाः जो जूता न पाए, वह मोज़ा पहन ले और जो तहबंद न पाए, वह पाज़ामा पहन ले।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा चार ज़िल-हिज्जा की सुब्ह को मक्का पहुँचे तो आपने उन्हें आदेश दिया कि हज के एहराम को उमरा का एहराम बना लें (और उमरा के बाद हलाल हो जाएँ)। ऐसे में उन्होंने पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! हमारे लिए कौन-कौन सी वस्तुएँ हलाल होंगी? तो आपने उत्तर दियाः तमाम वस्तुएँ हलाल हैं।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब अरफ़ा से मुज़दलिफ़ा की ओर चले तो किस गति से चल रहे थे? उन्होंने उत्तर दियाः मध्यम गति से चल रहे थे, लेकिन जब खाली जगह मिलती थी तो तेज़ चल लेते थे।
पाँच प्रकार के जीव-जन्तु हानिकारक हैं, उन्हें हरम के अंदर भी मारा जाएगा, कौआ, चील, बिच्छू, चूहा और काटने वाला कुत्ता।
न कमीज पहने, न साफ़े बाँधे, न पाजामे पहने, न सरपोश वाला जामा पहने और न मोज़ा पहने। हाँ, यदि किसी के पास जूते न हों तो मोज़े पहन सकता है, लेकिन उन्हें टखनों के नीचे तक काट ले।
अगर मुझे पहले वह बात मालूम हो गई होती, जो बाद में मालूम हुई, तो मैं साथ में क़ुरबानी का जानवर न लाता तथा यदि मैं क़ुरबानी का जानवर न लाया होता, तो हलाल हो जाता।
जिसने नमाज़ पढ़ने से पहले क़ुरबानी कर ली, वह उसके स्थान पर दूसरी क़ुरबानी करे और जिसने क़ुरबानी नहीं की, वह अल्लाह के नाम से क़ुरबानी करे।
"ऐ अल्लाह, सिर मुंडवाने वालों पर दया कर।" लोगों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, बाल छोटे करवाने वालों पर? फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, सिर मुंडवाने वालों पर दया कर।" लोगों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, बाल छोटे करवाने वालों पर? फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, सिर मुंडवाने वालों पर दया कर।" लोगों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, बाल छोटे करवाने वालों पर? फ़रमायाः "बाल छोटे करवाने वालों पर भी।"
ज़माना घूमकर आज फिर उसी हालत पर आ गया है, जो हालत उस दिन थी, जिस दिन अल्लाह ने आसमान व ज़मीन को पैदा किया था। साल के बारह महीने हैं, जिनमें चार महीने हराम हैं: तीन लगातार हैं, यानी ज़ुल- क़ादा, ज़ुल- हिज्जा, मुहर्रम और मुज़र क़बीले का रजब।
नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी हज यात्रा एक पुराने ज़ीन तथा मामूली चादर पर (आरंभ) की जिसका मुल्य चार दिरहम के बराबर था या उस से भी कम था, फिर आप ने कहाः ऐ अल्लाह, ऐसा हज विशुद्ध रूप से केवल तेरे लिए है जिस में ढ़ोंग व पाखंड का कोई अंश नहीं है।
हमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हुदैबिया के साल एक ऊँट सात लोगों की ओर से ज़बह किया तथा एक गाय सात लोगों की ओर से ज़बह किया।
मुझे हज्जतुल वदा के अवसर पर अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हज कराया गया, जबकि उस समय मेरी आयु सात साल थी।
अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक ऊँट पर बैठकर हज किया, जिसमें आपके खाने के सामान तथा अन्य वस्तुएँ रखी थीं।
उकाज़, मजिन्ना और ज़ुल-मजाज़ जाहिलियत काल के बाज़ार थे। पर सहाबा ने हज के दिनों में व्यापार करने को पाप समझा, तो यह आयत उतरीः "ليس عليكم جناح أن تبتغوا فضلاً من ربكم" (अर्थातः तुमपर इसमें कोई गुनाह नहीं है कि अपने पालनहार की अनुकंपा तलाश करो।)
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (मदीने से) अल-शजरा के रास्ते से निकलते और अल-मुअर्रस के रास्ते से अंदर आते। और जब मक्का में प्रवेश करते, तो ऊँची घाटी से प्रवेश करते और निचली घाटी से निकलते।
'तमत्तो' (अर्थात हज के अवसर पर उमरा करके एहराम खोल देने और नए सिरे से एहराम बाँधकर हज करने) की आयत उतरी और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें उसपर अमल करने का आदेश भी दिया। बाद में कोई ऐसी आयत नहीं उतरी, जो इस आयत के आदेश को निरस्त करती हो तथा रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने जीवन काल में कभी इससे मना नहीं किया।
मैंने अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से 'हज्जे तमत्तो' के बारे में पूछा, तो उन्होंने मुझे उसका आदेश दिया। फिर मैंने उनसे क़ुरबानी के बारे में पूछा, तो बतायाः उसमें ऊँट, गाय, बकरी या जानवर का एक हिस्सा ज़बह करना है। वह कहते हैंः लेकिन ऐसा लगा कि कुछ लोग उसे नापसंद कर रहे हैं।
एहराम बाँधे व्यक्ति का ऐसे शिकार का मांस खाना, जिसे उसके लिए शिकार न किया गया हो और उसने शिकार करने में मदद भी न की हो।
मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि जब मक्का आते और (तवाफ़ शुरु करते समय) हजरे असवद को छूते, तो तीन चक्कर दुलकी चाल से चलते।
ऐ अल्लाह के रसूल! क्या बात है कि लोगों ने उमरा करने के बाद एहराम खोल दिया है और आपने उमरा के बाद एहराम नहीं खोला? तो आपने फ़रमायाः मैंने अपने बाल जमा लिए थे और क़ुर्बानी के जानवरों को निशान लगा दिए थे। अतः, जब तक कुर्बानी न कर लूँ, एहराम नहीं खोल सकता।
हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ हज के लिए तल्बिया पुकारते हुए आए तो आपने हमें आदेश दिया और हमने उसे उमरा में बदल दिया।
मुझे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास लाया गया तो जूएँ मेरे चेहरे पर झड़-झड़कर गिर रही थीं। यह देख आपने कहाः मैं नहीं समझता था कि तुम्हारी तकलीफ़ इस हद तक पहुँच चुकी है, जो अभी मैं देख रहा हूँ। (अथवा मैं नहीं समझता था कि तुम्हारी परेशानी इस हद तक पहुँच चुकी है, जो मैं देख रहा हूँ) क्या तुम्हें एक बकरी मिल सकती है? उसने कहाः नहीं। तो फ़रमायाः तीन रोज़े रखो या छह निर्धनों को खाना खिलाओ।
यह बाँझ हो तथा इसका गला दुखे, क्या इसने क़ुरबानी के दिन तवाफ़ कर लिया है?" कहा गया कि हाँ! तो फ़रमायाः "फिर चलो चलें।"
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने क़ुरबानी के दिन नमाज़ के पश्चात ख़ुतबा देते हुए फ़रमायाः "जिसने हमारी तरह नमाज़ पढ़ी तथा हमारी तरह क़ुरबानी की, उसकी क़ुरबानी सही है और जिसने नमाज़ से पहले क़ुरबानी की, उसकी क़ुरबानी सही नहीं है।"
सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने मक्का से हाथी वालों को रोक दिया था और उसने अपने रसूल तथा मोमिनों को उसपर विजय प्रदान किया है। देखो, यह न तो मुझसे पहले किसी के लिए हलाल हुआ था और न मेरे बाद किसी के लिए हलाल होगा। यह मेरे लिए भी केवल दिन की एक घड़ी के लिए हलाल हुआ था और इस समय हराम है।
यह एक ऐसी चीज़ है, जिसे अल्लाह ने आदम की बेटियों पर लिख दी है। तुम वह सारे कार्य करती जाओ, जो दूसरे हाजी करते हैं। हाँ, पाक होने से पहले अल्लाह के घर का तवाफ़ (परिक्रमा) मत करना
मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।
किसी मुसलमान औरत के लिए जायज़ नहीं कि एक दिन एवं एक रात की यात्रा किसी महरम के बिना करे।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के तलबिया में यह शब्द हुआ करते थे: (ऐ अल्लाह! मैं उपस्थि हूँ। मैं उपस्थित हूँ। मैं उपस्थित हूँ, तेरा कोई साझी नहीं है, मैं उपस्थित हूँ, निस्संदेह हर प्रशंसा और नेमत तेरी है और तेरी ही बादशाहत है, तेरा कोई साझी नहीं है।)
जिस व्यक्ति के पास क़ुरबानी का जानवर हो, जिसे वह ज़बह करने का इरादा रखता हो, तो जुल-हिज्जा का चाँद निकल आने के बाद वह क़ुरबानी से पहले अपने बालों और नाख़ुनों में से कुछ न काटे।