عن الصعب بن جَثَّامَةَ -رضي الله عنه-، قال: أهديتُ رسولَ الله - صلى الله عليه وسلم - حماراً وحشياً، فَرَدَّهُ عَلَيَّ، فلما رأى ما في وجهي، قال: «إنا لم نَرُدَّهُ عليك إلا لأنَّا حُرُمٌ».
[صحيح] - [متفق عليه]
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साब बिन जस्सामा (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को एक जंगली गधा भेंट किया, तो मुझे वापस कर दिया। लेकिन जब मेरे चेहरे पर ग़म के निशान देखे, तो फ़रमाया : "हमने इसे केवल इसलिए तुम्हें वापस किया है, क्योंकि हम एहराम की अवस्था में हैं।"
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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