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हदीसों की सूची 104

जिबरील मुझे बराबर पड़ोसी के बारे में ताकीद करते रहे, यहाँ तक कि मुझे लगने लगा कि वह उसे वारिस बना देंगे।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मन्नत मानने से मना किया है और कहा है : "मन्नत कोई भलाई नहीं लाती। इसके द्वारा केवल कंजूस का धन निकाला जाता है।
जहाँ तक मेरी बात है, तो अल्लाह की क़सम, अगर अल्लाह ने चाहा, तो जब भी मैं किसी बात की क़सम खाऊँगा और दूसरी बात को उससे बेहतर देखूँगा, तो अपनी क़सम का कफ़्फ़ारा अदा कर दूँगा और वही करूँगा, जो बेहतर हो।
जिसने किसी बात पर जान-बूझकर इस्लाम के अतिरिक्त किसी अन्य धर्म की झूठी क़सम खाई, तो वह वैसा ही होगा, जैसा उसने कहा
जिसे यह पसंद हो कि अल्लाह उसे क़यामत के दिन की परेशानियों से मुक्त कर दे, उसे चाहिए कि किसी अभावग्रस्त व्यक्ति को मोहलत दे या उसका क़र्ज़ माफ़ कर दे।
ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे दो पड़ोसी हैं। मैं दोनों में से किसे कोई वस्तु भेंट के रूप में दूँ? आपने कहाः जिसका द्वार तेरे द्वार से अधिक निकट हो।
मक्का विजय के बाद हिजरत नहीं रही, लेकिन जिहाद और नीयत बाक़ी हैं। तथा जब जिहाद के लिए निकलने को कहा जाए तो अविलंब निकल पड़ो।
जो एक बित्ता समान भी ज़मीन हड़पेगा, उसकी गरदन में सात ज़मीनों का तौक डाला जाएगा।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुनाबज़ा से मना किया है। वह यह है कि बेचने वाला अपना कपड़ा ख़रीदने वाले की ओर बेचने के लिए फेंक दे और उसे उलटने पलटने या देखने का अवसर न मिले। इसी तरह आपने मुलामसा से भी मना किया है। वह यह है कि खरीदने वाला कपड़े को केवल छू ले और उसे देखे नहीं।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने (पेड़ पर लगे हुए) फल को रंग पकड़ने से पहले बेचने से मना किया है। पूछा गया कि रंग पकड़ने का क्या मतलब है? तो फ़रमाया : वह लाल हो जाएँ। फ़रमाया : "भला बताओ कि यदि अल्लाह ने फल रोक लिए, तो बेचने वाला किस चीज़ के बदले अपने भाई के धन को हलाल बनाएगा?"
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फलों को प्रयोग के लायक़ होने से पहले बेचने से मना किया है। आपने बेचने वाले और ख़रीदने वाले दोनों को मना किया है।
चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। गेहूँ, गेहूँ के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। जौ, जौ के बदले में अगर नक़द न हो, तो सूद हो जाता है। खजूर, खजूर के बदले में अगर नक़द न हो, तो सूद हो जाता है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस बात से मना किया है कि कोई नगर का रहने वाला किसी देहात में रहने वाले का सामान बेचे (तथा फ़रमाया कि) तुम आपस में दाम न बढ़ाओ तथा कोई अपने भाई के सौदे पर सौदा न करे और न उसके विवाह-संदेश पर अपना विवाह-संदेश भेजे।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सोने को चाँदी के बदले में उधार बेचने से मना फ़रमाया है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने चाँदी को चाँदी के बदल में और सोने को सोने के बदल में बेचने मना फ़रमाया है। हाँ, यदि बराबर हो तो कोई बात नहीं है। और हमें आदेश दिया है कि हम चाँदी को सोने के बदले, जिस तरह चाहें खरीदें और सोने को चाँदी के बदले जिस तरह चाहें, खरीदें।
जो भी सोना या चाँदी रखने वाला व्यक्ति अपने उस धन का हक़ (ज़कात) अदा नहीं करता, उसके लिए क़यामत के दिन आग की तख़्तियाँ तैयार की जाएँगी
जिसने क़सम खाते हुए कहा: बेशक मैं इस्लाम से बरी हूँ, और वह झूठा है, तो वह वैसा ही है, जैसा कि उसने कहा है और यदि वह सच्चा है, तो इस्लाम में सुरक्षित नहीं लौट सकेगा
''जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसके कर्मों का सिलसिला रुक जाता है, सिवाय तीन चीज़ों के : स़दक़ा जारिया (अनवरत चलने वाला दान), ऐसी विद्या छोड़कर जाना जिससे लोग लाभांवित हों अथवा ऐसी नेक (सदाचारी) संतान, जो उसके लिए (मरने के बाद) दुआ करे।''
हे अल्लाह के रसूल! साद की माता मृत्यु को प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में कौन-सा सदक़ा सर्वश्रेष्ठ है? फ़रमाया : "पानी।" कहते हैं कि उन्होंने एक कुआँ खुदवा दिया और कह दिया कि यह कुआँ साद की माता के लिए है।
''एक दूसरे को उपहार दिया करो, इससे परस्पर प्रेम बढ़ेगा।''
साद बिन उबादा ने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-से पूछा कि उनकी माँ ने एक मन्नत मानी थी, परन्तु उसे पूरा करने से पहले ही गुज़र गई। अब उन्हें क्या करना है? आपने फ़रमायाः उसे तुम पूरा कर दो।
जिसने किसी मुसलमान का माल हड़पने के लिए झूठी क़सम खाई, वह अल्लाह से इस हाल में मिलेगा कि अल्लाह उससे सख़्त क्रोधित होगा।
जिसने किसी मुसलमान व्यक्ति का माल हड़पने के लिए अकाट्य एवं झूठी क़सम खाई, वह अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि वह उससे सख़्त क्रोधित होगा
मेरी बहन ने यह मन्नत मानी कि वह नंगे पाँव पैदल अल्लाह के पवित्र घर की यात्रा करेगी। फिर मुझसे कहा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछकर आऊँ। मैंने आपसे पूछा तो फ़रमायाः वह चले भी और सवार भी हो।
ऐ अब्दुर्रहमान बिन समुरा! सत्ता न माँगो, क्योंकि यदि माँगने पर सत्ता दिए गए, तो तुम उसी के हवाले कर दिए जाओगे
जो किसी बात पर क़सम खा ले, फिर उससे अधिक परहेज़गारी वाली बात देखे, तो परहेज़गारी वाला कार्य करे।
उसे दे दो, क्योंकि तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे तरीके से उधार चुकाने वाला हो
तुमसे पहले के लोगों में से एक व्यक्ति का हिसाब लिया गया, तो उसके पास कोई भी पुण्यकर्म नहीं मिला। मिला तो बस इतना कि वह एक धनी व्यक्ति था, लोगों के साथ मामला करता था और अपने सेवकों को आदेश देता था कि जो क़र्ज़ अदा करने में असमर्थ हो, उसे क्षमा कर दें। अतः, अल्लाह ने कहाः हम उसकी तुलना में इसे क्षमा कर देने के अधिक हक़दार हैं, जाओ, उसे माफ़ कर दो।
तुममें से कोई अपनी रस्सियाँ लेकर पर्वत की ओर जाए और अपनी पीठ पर लकड़ियों का गट्ठर लादकर ले आए तथा उसे बेचे और इस तरह अल्लाह उसके चेहरे को (माँगने के अपमान से) बचा ले तो यह उसके लिए इस बात से बेहतर है कि लोगों से माँगे और लोग उसे दें या देने से मना कर दें।
जिसने अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए एक घोड़ा सुरक्षित रखा तथा ऐसा अल्लाह पर ईमान और उसके वचन को सच मानते हुए किया तो क़यामत के दिन उसे उसके खाने, पीने और पेशाब तथा गोबर, हर चीज़ का प्रतिफल मिलेगा।
अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे एक ऊँट खरीदा और उन्हें क़ीमत नापकर देते समय कुछ अधिक दिया।
''ऐ अबूज़र! जब शोरबा पकाओ, तो उसमें पानी ज़्यादा डाल दो और पड़ोसियों का भी ख़्याल रख लो।''
अशअरी लोग जब युद्ध में खाने-पीने की चीज़ों की कमी का सामना करते हैं या शहर में उनके बाल बच्चों का खाना कम पड़ने लगता है,
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक अज़्दी व्यक्ति, जिसे इब्न अल-लुतबिया कहा जाता था, को ज़कात का धन इकट्ठा करने का ज़िम्मेवार बनाया। जब वह वापस आया, तो बोला : यह आप लोगों का है और यह मुझे भेंट स्वरूप दिया गया है। यह देख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मिंबर पर खड़े हुए तथा अल्लाह की बड़ाई व प्रशंसा की
किसी मुसलमान के लिए उचित नहीं है कि उसके पास कोई वस्तु हो, जिसकी वह वसीयत करना चाहता हो और वह वसीयतनामा लिखे बिना दो रात भी गुज़ारे।
जो अपना धन किसी ऐसे व्यक्ति के पास पाए, जो दिवालिया हो गया हो, तो वह दूसरे के मुक़ाबले में उसका अधिक हक़दार है।
जिसने खजूर का ऐसा पेड़ बेचा, जिसका परागण किया जा चुका हो, तो उसका फल बेचने वाले का होगा। हाँ, यदि खरीदने वाले ने शर्त लगा दी हो, तो उसका होगा।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने व्यवसायिक काफ़िलों से आगे जाकर मिलने और देहात वाले की ओर से नगर वासी के बेचने से मना किया है।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुज़ाबना यानी इस बात से मना फ़रमाया है कि बाग में लगे हुए फल यदि खजूर हों, तो उन्हें सूखी खजूरों के बदले में नापकर बेचा जाए, और अगर अंगूर हों तो उन्हें किशमिश के बदले में नापकर बेचा जाए या फिर खेती को गल्ले के बदले में नापकर बेचकर जाए। आपने इन सब से मना किया है।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक यहूदी से खाने की वस्तु ख़रीदी और उसके पास अपना लोहे का कवच गिरवी रख दिया।
अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भूमि के किसी एक भाग की पैदावार के बदले में भूमि किराए पर लेने, बाली में मौजूद गेहूँ को बाली से अलग किए हुए गेहूँ के बदले में बेचने, पेड़ में लगी हुई खुजूर को तोड़ी हुई खुजूर के बदले में बेचने, फल को उपयोग के योग्य होने से पहले बेचने तथा उसे दीनार एवं दिर्हम के अतिरिक्त किसी और वस्तु के बदले में बेचने से मना किया है। मगर हाँ, ताज़ा खुजूरों को सूखी खुजूरों के बदले में अनुमान लगाकर बेचने की अनुमति दी है।
ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे खै़बर में एक ज़मीन मिली है, इस से अधिक मूल्यवान वस्तु कभी नहीं मिली, आप मुझे इस के बारे क्या आदेश देते हैं? तो आप ने फ़रमायाः चाहो तो मूल को रोके रखो और उसकी उपज का सदक़ा करो।
ओह, ओह यही तो सूद है। यही तो सूद है। ऐसा न करो, लेकिन जब तुम ख़रीदना चाहो तो अपने पास मौजूद खुजूर को बेच दो और उसके पैसे से ख़रीदो।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कुत्ते की क़ीमत, वेश्या की कमाई और काहिन (भविष्य वक्ता, ज्योतिषी) के पारिश्रमिक से मना फ़रमाया है।
क्या तुम समझते हो कि मैंने तुम्हारा ऊँट लेने के लिए उसका मूल्य कम लगाया है? तुम अपना ऊँट और अपने दिर्हम ले लो। सब तुम्हारा है।
उसे न खरीदो और सद्क़ा किया हुआ सामान वापस न लो, यद्धपि वह तुम्हें एक दिर्हम ही में क्यों न दे, क्योंकि हिबा (हदिया, उपहार) किए हुए सामान को लौटाने वाला व्यक्ति वैसा ही है, जैसे उल्टी को खाने वाला।
जो बै-ए-सलम (एक प्रकार की खरीद-बिक्री की विधि व प्रणाली) करना चाहे तो वह ज्ञात नाप और ज्ञात वज़न में एवं ज्ञात अवधि तक के लिए करे।
हम अनसार में सबसे अधिक खेती वाले थे तथा हम ज़मीन इस शर्त पर किराए पर देते थे कि उसके इस भाग की पैदावार हमारी है और उस भाग की पैदावार किराए पर लेने वाले की।लेकिन कभी यह भाग तो पैदावार देती, परन्तु वह भाग पैदावार नहीं देती थी। अतः, आपने हमें इससे मना कर दिया। रही बात चाँदी के बदले किराए पर देने की, तो आपने हमें इससे मना नहीं किया है।
सोना सोने के बदले न बेचो, मगर बराबर-बराबर। एक को दूसरे से अधिक न करो। उसी तरह, चाँदी को चाँदी के बदले न बेचो, मगर बराबर-बराबर। एक को दूसरे से अधिक न करो। तथा इनमें से उपस्थित को अनुपस्थित के बदले न बेचो।
"कोई पड़ोसी अपने पड़ोसी को अपनी दीवार में लकड़ी गाड़ने से न रोके।" फिर अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) फ़रमातेः क्या बात है किे मैं तुम्हें इस आदेश से मुँह फेरते हुए देखता हूँ? अल्लाह की क़सम! मैं इस आदेश को तुम्हारे बीच आम करके रहूँगा।
जो किसी मुस्लिम दास को मुक्त करता है, अल्लाह उसके एक-एक अंग के बदले में इसके एक-एक अंग को जहन्नम से मुक्त कर देता है, यहाँ कि उसकी शर्मगाह के बदले इसकी शर्मगाह को मुक्त कर देता है।
ख़रीद- बिक्री में अधिक क़सम खाने से बचो, क्योंकि कसम बढ़ा कर फिर घटा देती है
तुममें से जो अपने परिवार के प्रति क़सम खाता है और उसपर अटल रहता है, तो वह प्रायश्चित, जिसे अल्लाह ने उसपर फ़र्ज़ किया है, उसे देने और क़सम न तोड़ने के विपरीत अधिक पापी है
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मीठी चीज़ें और मधु पसंद करते थे। सामान्यतः जब अस्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो एक-एक कर अपनी पत्नियों के पास जाते और उनके पास बैठते। (एक दिन) आप हफ़सा (रज़ियल्लाहु अंहा) के पास गए और उनके यहाँ सामान्य से अधिक रुक गए।
आदम की संतान को ऐसी वस्तु की मन्नत मानने का अधिकार नहीं, जिसका वह मालिक न हो, ऐसे दास को मुक्त करने का अधिकार नहीं जिसका वह स्वामी न हो और ऐसी स्त्री को तलाक़ देने का अधिकार नहीं जो उसके निकाह में न हो।
यह आयत {لا يؤاخذكم الله باللغو في أيمانكم} (अल्लाह तुम्हारी निरर्थक क़समों पर तुम्हारी पकड़ नहीं करेगा।) [सूरा बक़रा : 225] लोगों की इस तरह की बातों के बारे में उतरी है : नहीं अल्लाह की क़सम तथा क्यों नहीं अल्लाह की क़सम।
“मन्नत का कफ़्फ़ारा, क़सम का कफ़्फ़ारा ही है।”
जो शख़्स किसी मुसलमान ग़ुलाम को आज़ाद करेगा, तो अल्लाह आज़ाद किए गए ग़ुलाम के शरीर के हर अंग के बदले उसके शरीर का एक अंग दोज़ख़ से आज़ाद करेगा।
अल्लाह तआला फ़रमाता है : तीन आदमी ऐसे हैं कि क़यामत के दिन मैं उनका दुश्मन होऊंगा
सुलैमान बिन दाऊद (अलैहिमस्सलाम) ने फ़रमायाः आज रात मैं सत्तर स्त्रियों के पास जाऊँगा, उनमें से हर स्त्री से एक-एक लड़का होगा, जो अल्लाह के रास्ते में जिहाद करेगा
जिसने किसी गुलाम में अपना भाग मुक्त किया तथा उसके पास इतना धन हो, जो उसकी पूरी क़ीमत को पहुँचता हो, तो गुलाम की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाए और अन्य साझेदारों को उसकी ओर से उनके हिस्सों की क़ीमत अदा कर दिए जाए, तभी उसकी ओर से पूरा गुलाम मुक्त होगा, अन्यथा उसकी ओर से जितना मुक्त हुआ, सो हुआ
जिसने किसी दास में अपना भाग मुक्त कर दिया, उसे अपने धन से पूरा दास मुक्त करना होगा। परन्तु, यदि उसके पास पर्याप्त धन न हो, तो उस दास की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाएगी और उस दास से प्रयास करने को कहा जाएगा। हाँ, मगर उसे तंग नहीं किया जाएगा
तीन आदमी ऐसे हैं, जिनको दोगुना सवाब मिलेगा। एक वह अह्ले किताब जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाया, दूसरा वह ग़ुलाम जो अल्लाह का और अपने मालिकों का हक़ अदा करता रहा और तीसरा वह व्यक्ति, जिसके पास कोई दासी हो, फिर वह उसे शिष्टाचार सिखाए और अच्छी तरह सिखाए तथा शिक्षा दे और अच्छी से अच्छी शिक्षा दे और आज़ाद करके शादी कर ले, तो उसके लिए भी दोगुना सवाब है।
बहुत ख़ूब, यह तो बहुत लाभदायक माल है। यह तो वाकई लाभदायक धन है। जो कुछ तुमने कहा, उसे मैंने सुन लिया। मेरी राय यह है कि तुम इसे अपने रिश्तेदारों में बाँट दो।
एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक बुनी हुई धारीदार चादर लेकर आईं
अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने 'वला' (ऐसा अधिकार जिसके कारण दास को मुक्त करने वाला अपने मुक्त किए दास के मरने के बाद उसकी संपत्ति में से निर्दिष्ट हिस्सों वालों के बाद शेष भाग का वारिस बनता है) को बेचने तथा उसे उपहारस्वरूप देने से मना फ़रमाया है।
यदि तुम पीछे रहकर भी अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अच्छे कर्म करोगे, तो तुम्हारे दर्जे ऊँचे होंगे। यह भी संभव है कि तुम अभी जीवित रहो और बहुत-से लोगों को तुमसे लाभ हो और बहुत-से लोगों को हानि।
व्यवसायिक दलों से आगे बढ़कर न मिलो, तुममें से कोई अपने भाई के सौदे पर सौदा न करे, आपस में दाम न बढ़ाओ, नगर का रहने वाला देहात में रहने वाले का सामान न बेचे तथा दूध देने वाली ऊँटनी और बकरी को बेचने के लिए थन में उसका दूध रोक कर न रखो।
अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़ैबर वालों से फल तथा अनाज आदि वहाँ की पैदावारों के आधे भाग पर मामला तय किया।
मैंने राफ़े बिन खदीज से सोने-चाँदी (अर्थात नकदी) के बदले भूमि किराए पर लेने के बारे में पूछा तो फ़रमायाः इसमें कोई हर्ज नहीं है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पाँच वसक़ या उससे कम में अ़राया क्रय-विक्रय अर्थात सूखी खुजूरों के बदले में पेड़ पर लगे हुए ताज़ा खुजूरों को अनुमान लगाकर खरीदने की अनुमति दी है। (वसक़, तोलने में एक विशेष भार को इंगित करने वाला एक विशेष प्रकार का माप है, जो तकरीबन 130.56 किलोग्राम का होता है, इस प्रकार पाँच वसक़ का वज़न होगा, छः क्विंटल तिरपन (653) किलोग्राम लगभग)।
ज़ैद बिन साबित कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अ़रिय्या करने वाले अर्थात सूखी खुजूर के बदले में ताज़ा खुजूर खरीदने वाले को अनुमान लगाकर सौदा करने की अनुमति दी है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से गिरे हुए सोना-चाँदी के बारे में पूछा गया तो आपने फ़रमायाः उसके बंधन तथा थैली को अच्छी तरह पहचान लो। फिर एक साल तक उसका ऐलान करो। इसके बाद भी यदि मालूम न हो तो उसे खर्च करो, लेकिन यह तुम्हारे पास अमानत होगी। यदि किसी भी दिन उसे तलाश करने वाला आ जाए तो उसे उसके हवाले कर दो।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने किसी को जीवन भर के लिए दी गई वस्तु के बारे में निर्णय दिया कि वह उसी की है, जिसे दी गई है।
अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हर उस वस्तु में शुफ़आ़ (साँझे की संपत्ति में एक साझीदार के अपना हिस्सा बेच देने की स्थिति में दूसरे साझीदार अथवा साझीदारों के लिए खरीदने वाले को उसकी क़ीमत देकर उसे प्राप्त करने का अधिकार) रखा है (तथा एक रिवायत के अनुसार शुफ़आ़ का निर्णय दिया है), जो बाँटी न गई हो। परन्तु जब सीमाएँ स्थापित हो जाएँ और रास्ते निकाल दिए जाएँ तो शुफ़आ़ नहीं है।
आज़ाद किए हुए ग़ुलाम की मृत्यु के पश्चात, उसका उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में, उसके उत्तराधिकारी होने का अधिकार उसे प्राप्त होगा, जिसने उसे आज़ाद किया है।
वयस्क हो जाने के बाद आदमी अनाथ नहीं रहता और रात होने तक दिन भर ख़ामोश रहने का कोई औचित्य नहीं है।
अबू बकर सिद्दीक़ -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- अहमस समुदाय की ज़ैनब नामी एक महिला के पास गए, तो देखा कि वह बात नहीं कर रही है।
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बनी इसराईल के एक व्यक्ति की घटना सुनाई, जिसने बनी इसराईल के एक अन्य व्यक्ति से एक हज़ार दीनार क़र्ज़ माँगे थे।
बेशक अल्लाह ने हर हक़ वाले को उसका हक़ दे दिया है और वारिस के लिए कोई वसीयत नहीं है। बिस्तर वाले के लिए बच्चा है और व्यभिचारी के लिए पत्थर है। जो पिता को छोड़कर दूसरे से अपने को मंसूब करता है अथवा मुक्त करने वाले को छोड़कर दूसरे की ओर निस्बत करता है, उसपर अल्लाह की लानत है। अल्लाह उसकी न फ़र्ज़ इबादत ग्रहण करेगा, न नफ़ल इबादत।
मैं बनी मुक़र्रिन का सातवाँ व्यक्ति था। हमारी एक दासी थी, जिसे सबसे छोटे भाई ने एक थप्पड़ मार दिया था, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें उसे मुक्त करने का आदेश दिया
यह जो नमाज़ है, इसमें लोगों की आम बात-चीत सही नहीं है। इसमें तो बस तसबीह, तकबीर और क़ुरआन की तिलावत होती है।
ईसा बिन मरयम -अलैहिस्सलाम- ने एक व्यक्ति को चोरी करते देखा, तो उससे कहाः क्या तूने चोरी की है? उसने कहाः बिलकुल नहीं, उस अल्लाह की क़सम, जिसके सिवा कोई वंदनीय नहीं है। इस पर ईसा -अलैहिस्सलाम- ने कहाः मैं अल्लाह पर ईमान लाया और अपनी आँख को झुठलाया।
सफ़ीना -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं उम्मे सलमा -रज़ियल्लाहु अन्हा- का ग़ुलाम था, तो उन्होंने कहा : मैं तुझको आज़ाद करती हूँ इस शर्त पर कि तू जब तक जीवित रहेगा अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की सेवा करता रहेगा।
मुकातब (वह ग़ुलाम जो अपने मालिक से यह अनुबंध कर ले कि कुछ पैसा लेकर वह उसको आज़ाद कर देगा) उस समय तक ग़ुलाम है जब तक उसके ऊपर उस अनुबंध का एक दिरहम भी बाकी है।
जिसने अपनी (झूठी) क़सम से किसी मुसलमान का हक़ मारा, उसके लिए अल्लाह ने जहन्नम को वाजिब और जन्नत को हराम कर दिया।" एक व्यक्ति ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! चाहे वह चीज़ थोड़ी-सी क्यों न हो? आपने उत्तर दिया : "यद्यपि पीलू पेड़ की एक छोटी-सी शाखा ही क्यों न हो।
“अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है।” पूछा गया कि ऐ अल्लाह के रसूल! यह बात आप किसके बारे में कह रहे हैं? आपने उत्तर दिया : “जिसका पड़ोसी उसके कष्ट से सुरक्षित नहीं रहता।”
सोना के बदले में सोना, चाँदी के बदले में चाँदी, गेहूँ के बदले में गेहूँ, जौ के बदले में जौ, खजूर के बदले में खजूर और नमक के बदले में नमक, बराबर बराबर और समपरिमाण में होना चाहिए और हाथों हाथ आदान-प्रदान होना चाहिए। अगर ये वर्ग अलग-अलग हों और ख़रीद-बिक्री नक़द हो, तो तुम जैसे चाहो ख़रीद-बिक्री कर सकते हो।