1. मुख्य
  2. श्रेणियाँ
  3. फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

हदीस व्यवसायिक दलों से आगे बढ़कर न मिलो, तुममें से कोई अपने भाई के सौदे पर सौदा न करे, आपस में दाम न बढ़ाओ, नगर का रहने वाला देहात में रहने वाले का सामान न बेचे तथा दूध देने वाली ऊँटनी और बकरी को बेचने के लिए थन में उसका दूध रोक कर न रखो।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم : «لا تَلَقَّوُا الرُّكبان، ولا يبع بعضكم على بيع بعض، ولا تَنَاجَشُوا ولا يبع حَاضِرٌ لِبَادٍ، ولا تُصَرُّوا الإبلَ والغنم، ومن ابتاعها فهو بخير النَّظَرَين بعد أن يحلبها: إن رَضِيَهَا أمسكها، وإن سَخِطَها رَدَّهَا وَصَاعا ًمن تمر».

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः व्यवसायिक दलों से आगे बढ़कर न मिलो, तुममें से कोई अपने भाई के सौदे पर सौदा न करे, आपस में दाम न बढ़ाओ, नगर का रहने वाला देहात में रहने वाले का सामान न बेचे तथा दूध देने वाली ऊँटनी और बकरी को बेचने के लिए थन में उसका दूध रोक कर न रखो। यदि किसी ने इस तरह का जानवर ख़रीदा तो दोहने के बाद उसे दो बातों में से जो बेहतर हो, उसका अधिकार होगा; जानवर उसे पसंद आए तो अपने पास रख ले और पसंद न आए तो वापस कर दे तथा साथ में एक साअ खुजूर भी देगा।

सह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

स्पष्टीकरण

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पाँच प्रकार की ख़रीद-बिक्री से मना फ़रमाया, जो हराम हैं। इनसे मना करने का कारण यह है कि इनसे ख़रीदने वाले, बेचने वाले या किसी और को नुक़सान होता है। 1. आपने इस बात से मना किया है कि जो लोग खाने-पीने की वस्तु या पशु आदि को बेचने के लिए बाज़ार ला रहे हों, उनके बाज़ार पहुँचने से पहले ही कोई आगे बढ़कर उनसे मिले और उनका सामान ख़रीद ले। इससे मना करने का कारण यह है कि बेचने वाले को भाव का पता नहीं होता। अतः संभव है कि धोखे में कम क़ीमत देकर उनसे सामान ख़रीद लिया जाए और बाज़ार आकर अधिक दाम पाने का उनका प्रयास निष्फल हो जाए। 2. इसी तरह किसी के बेचने पर बेचने और किसी के ख़रीदने पर ख़रीदने से मना किया है। इसकी सूरत यह है कि कोई खरीदने वाले से ख़रीद-बिक्री की मजलिस में या सामान रखने अथवा लौटाने के अधिकार की अवधि में कहेः मैं तुम्हें इससे अच्छा सामान दूँगा या इससे कम दाम में दूँगा। या फिर बेचने वाले से कहे कि मैं तुमसे इससे अधिक दाम में ख़रीद लूँगा। उद्देश्य यह हो कि उह मामले को निरस्त करके उससे मामला कर ले। इसी तरह बाद में इस तरह की बात करने से भी मना किया है। क्योंकि इस तरह के उकसावे से आपसी द्वेष और शत्रुता पैदा होती है। इसके साथ ही यह किसी को उसकी रोज़ी से वंचित करने का सबब भी है। 3. इसी तरह ख़रीदने का इरादा न होने के बावजूद, बेचने वाले को लाभ पहुँचाने अथवा ख़रीदने वाले का नुक़सान करने के उद्देश्य से सामान का भाव बढ़ाने से मना किया है। क्योंकि यह ख़रीदने वाले को झूठ बोलने और उसके साथ धोखा करने तथा फ़रेब के सहारे सामान का दाम बढ़ाने का ज़रिया है। 4. इसी तरह इस बात से भी मना किया है कि कोई नगर का रहने वाला किसी देहाती का सामान बेचे, क्योंकि वह सामान का पूरा-पूरा भाव वसूल लेगा और उसमें कोई कमी नहीं रहने देगा कि ख़रीदने वालों को कुछ लाभ हो। इसी संदर्भ में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया हैः "लोगों को अपने हाल पर छोड़ दो कि अल्लाह उनमें से किसी को किसी के ज़रिए रोज़ी दे।" 5. किसी दूध देने वाले जानवर को बेचने से पहले उसके थन में दूध रोकना, ताकि ख़रीदने वाला यह समझे कि यह जानवर आम तौर पर इतना ही दूध देता है और उसे उसके वास्तविक दाम से अधिक दाम देकर ख़रीद ले। दरअसल, यह ख़रीदने वाले के साथ धोखा और उसपर अत्याचार है। यही कारण है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़रीदने वाले को तीन दिन का समय दिया है, ताकि वह चाहे तो उसे अपने पास रखे और चाहे तो वास्तविकता से अवगत होने के बाद बेचने वाले को लौटा दे। अगर उसने दूध दुहा है, तो जानवर के साथ दूध के बदले में एक सा खजूर भी देगा।

अनुवाद दिखाएँ

16 भाषा
EN English الإنجليزية
UR اردو الأوردية
ES Español الإسبانية
ID Indonesia الإندونيسية
UG ئۇيغۇرچە الأيغورية
BN বাংলা البنغالية
FR Français الفرنسية
TR Türkçe التركية
RU Русский الروسية
BS Bosanski البوسنية
SI සිංහල السنهالية
ZH 中文 الصينية
FA فارسی الفارسية
TL Tagalog تجالوج
HA Hausa الهوسا
PT Português البرتغالية