عن عائشة -رضي الله عنها-, وعبد الله بن عمر-رضي الله عنهما- قالا: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «ما زال جبريل يوصيني بالجار، حتى ظننت أنه سيورِّثه».
[صحيح] - [متفق عليه من حديث ابن عمر -رضي الله عنهما-، ورواه مسلم من حديث عائشة -رضي الله عنها]
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आइशा एवं अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुम) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "जिबरील मुझे बराबर पड़ोसी के बारे में ताकीद करते रहे, यहाँ तक कि मुझे लगने लगा कि वह उसे वारिस बना देंगे।"
सह़ीह़ - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

जिबरील मुझे लगातार पड़ोसी पर तवज्जो देने की वसीयत करते रहे, यहाँ तक कि मुझे लगने लगा कि ऐसी कोई वह्य उतर आएगी, जिसके ज़रिए जिबरील पड़ोसी को वारिस बनाने का आदेश ले आएँगे।

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फ़ायदे

  1. पड़ोसी के अधिकार का महत्व और उसे अदा करने की अनिवार्यता।
  2. वसीयत के ज़रिए उसके अधिकार की ताकीद, उसके सम्मान, उससे प्रेम, उसका उपकार करने, उसे हानि से बचाने, बीमारी के समय उसे देखने के लिए जाने, खुशी के समय उसे मुबारकबाद देने और मुसीबत के समय उसे हौसला देने की ज़रूरत बयान करती है।
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