मेरे वारिस न दीनार तक़सीम करेंगे, न दिरहम। जो कुछ मैं अपनी पत्नियों के ख़र्च और अपने लिये काम करने वाले (ख़लीफ़ा आदि ) के ख़र्च के बाद छोड़ूँ, वह सदक़ा है।
निर्धारित हिस्से उनके हक़दारों तक पहुँचा दो और निर्धारित हिस्सों के बाद जो शेष बच जाए, वह मरने वाले के निकटतम पुरुष संबंधी के लिए है।
जो व्यक्ति कोई बोझ (कर्ज़ अथवा औलाद इत्यादि) छोड़ जाए, तो वह अल्लाह तथा उसके रसूल के ज़िम्मे है। जबकि जो व्यक्ति कोई माल छोड़ जाए, तो वह उसके वारिसों के लिए है। जिसका कोई वारिस न हो, मैं उसका वारिस हूँ। मैं उसकी ओर से दियत अदा करूँगा तथा उसका वारिस बनूँगा। मामूँ उसका वारिस है, जिसका कोई वारिस न हो। वह उसकी ओर से दियत अदा करेगा तथा उसका वारिस बनेगा।