عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:
«قَالَ اللهُ: أَنْفِقْ يَا ابْنَ آدَمَ أُنْفِقْ عَلَيْكَ».

[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 5352]
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया :
"अल्लाह फ़रमाता है : ऐ आदम की संतान! व्यय (खर्च) करो, तुमपर व्यय किया जाएगा।"

[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 5352]

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फ़रमाते हैं कि उच्च एवं महान अल्लाह ने कहा है : ऐ आदम की संतान! तुम उन जगहों में खर्च करो, जहाँ खर्च करना वाजिब या मुसतहब (वांछित) हो, मैं तुम्हें इसका बदला दोंगा, तुम्हारी रोज़ी में बरकत दूँगा और तुम्हें खुशहाली प्रदान करूँगा।

हदीस का संदेश

  1. सदक़ा करने तथा अल्लाह के मार्ग में खर्च करने की प्रेरणा।
  2. नेकी के कामों में खर्च करना रोज़ी में बरकत का एक बहुत बड़ा कारण है और अल्लाह बंदे को इसका बदला प्रदान करता है।
  3. यह हदीस उन हदीसों में से है, जो अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने रब से रिवायत करके कहा है। इस तरह की हदीस को हदीस-ए-क़ुदसी या हदीस-ए-इलाही कहा जाता है। इससे मुराद वह हदीस है, जिसके शब्द तथा अर्थ दोनों अल्लाह के हों। अलबत्ता इसके अंदर क़ुरआन की विशेषताएँ, जैसे उसकी तिलावत का इबादत होना, उसके लिए तहारत प्राप्त करना तथा उसका चमत्कार होना आदि, नहीं पाई जाती।
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