عن أسامة بن زيد -رضي الله عنهما- مرفوعاً: «ما تركت بعدي فتنة هي أضر على الرجال من النساء».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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उसामा बिन ज़ैद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित हे कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "मैंने अपने बाद कोई ऐसा फ़ितना नहीं छोड़ा, जो पुरुषों के हक़ में स्त्रियों से अधिका हानिकारक हो।"
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस हदीस में बताया है कि स्त्रियाँ फ़ितने का एक बहुत बड़ा सबब हैं। क्योंकि स्त्रियाँ जब बाहर निकलती हैं, पुरुषों से घुलती-मिलती हैं और उनके साथ तनहाई अख़्तियार करती हैं, तो अच्छे-अच्छों के क़दम डगमगा देती हैं।

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1: स्त्रियों का फ़ितना पुरुषों के हक़ में अन्य फ़ितनों की तुलना में अधिक ख़तरनाक है।