عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:
«لَا ضَرَرَ وَلَا ضِرَارَ، مَنْ ضَارَّ ضَرَّهُ اللَّهُ، وَمَنْ شَاقَّ شَقَّ اللَّهُ عَلَيْهِ».
[صحيح بشواهده] - [رواه الدارقطني] - [سنن الدارقطني: 3079]
المزيــد ...
अबू सईद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया :
"न किसी की अकारण हानि करना उचित है, न बदले में हानि करना उचित है। जो किसी का नुक़सान करेगा, अल्लाह उसका नुक़सान करेगा और जो किसी को कठिनाई में डालेगा, अल्लाह उसे कठिनाई में डालेगा।"
[शवाहिद के आधार पर स़ह़ीह़] - [इसे दाराक़ुतनी ने रिवायत किया है] - [सुनन दाराक़ुतनी - 3079]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि ख़ुद अपने वुजूद और दूसरे लोगों की किसी भी प्रकार की हानि करने से बचना ज़रूरी है। किसी के लिए भी न तो खुद अपने आपको कष्ट देना जयाज़ है और न किसी दूसरे को कष्ट देना जायज़ है। दोनों बातें समान रूप से नाज़ायज़ हैं।
किसी के लिए हानि के बदले में हानि करना भी जायज़ नहीं है। क़िसास के अतिरिक्त और कहीं हानि का निवारण हानि से नहीं किया जा सकता।
फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने चेतावनी दी है कि जो लोगों को हानि पहुंचाएगा, वह स्वयं हानि का शिकार होगा और जो लोगों के लिए कठिनाई करेगा, वह स्वयं कठिनाइयों का सामना करेगा।