عن أبي هريرة -رضي الله عنه- مرفوعاً: «ليس الشديد بالصُّرَعة, إنما الشديد الذي يملك نفسه عند الغضب».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "बलवान वह नहीं है, जो किसी को पछाड़ दे, बलवान तो वह है, जो क्रोध के समय अपने आप को नियंत्रण में रखे।"
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

असल शक्ति पट्ठों तथा शरीर की शक्ति नहीं है। और शक्तिशाली तथा बलवान व्यक्ति वह नहीं है, जो दूसरे बलवानों को हमेशा कुश्ती में पछाड़ दे, बल्कि असल शक्तिशाली तथा बलवान व्यक्ति वह है, जो सख्त क्रोध के समय अपने आपसे लड़कर उसे काबू में रखे। क्योंकि यह उसकी आत्मशक्ति और शैतान पर विजय प्राप्त करने का प्रमाण है।

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1: संयम की फ़ज़ीलत। अल्लाह तआला का फ़रमान है : "وإذا ما غضبوا هم يغفرون" यानी और जब क्रोध आ जाए तो क्षमा कर देते हैं।
2: क्रोध के समय अपने नफ़्स से लड़ना दुश्मन से लड़ने से कहीं अधिक मुश्किल है।
3: इस्लाम ने पूर्व इस्लामिक काल की शक्ति की अवधारणा को एक उच्च नैतिकता में बदल दिया, जो एक अलग पहचान वाले व्यक्तित्व का निर्माण करती है। चुनांचे उसकी नज़र में सबसे बलवान व्यक्ति वह है, जो अपने ऊपर कंट्रोल रखता हो और उसे उसकी इच्छाओं से अलग रखता हो।
4: क्रोध से दूर रहने का अनिवार्य होना, क्योंकि उसके बहुत-से आत्मीय, शारीरिक एवं सामाजिक नुक़सान हैं।
5: क्रोध एक मानव विशेषता है, जो आत्मसंयम जैसी कई चीजों को समाप्त कर देती है।