عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ رضي الله عنه:
أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ أَرَادَ بِنَاءَ الْمَسْجِدِ فَكَرِهَ النَّاسُ ذَلِكَ، وَأَحَبُّوا أَنْ يَدَعَهُ عَلَى هَيْئَتِهِ، فَقَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «مَنْ بَنَى مَسْجِدًا لِلهِ بَنَى اللهُ لَهُ فِي الْجَنَّةِ مِثْلَهُ».
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महमूद बिन लबीद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि
उसमान बिन अफ़्फ़ान रज़ियल्लाहु अनहु ने मस्जिद-ए-नबवी के दोबारा निर्माण का इरादा किया, तो लोगों ने इसे नापसंद किया। वह चाहते थे कि उसे उसकी असल हालत पर रहने दिया जाए। इसपर उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना है : "जिसने अल्लाह के लिए कोई घर बनाया, अल्लाह जन्नत में उसके लिए उसी जैसा घर बनाएगा।"