عَنْ أَبِي مُوسَى رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«مَثَلُ الَّذِي يَذْكُرُ رَبَّهُ وَالَّذِي لاَ يَذْكُرُ رَبَّهُ، مَثَلُ الحَيِّ وَالمَيِّتِ»، ولفظ مسلم: «مَثَلُ الْبَيْتِ الَّذِي يُذْكَرُ اللهُ فِيهِ، وَالْبَيْتِ الَّذِي لَا يُذْكَرُ اللهُ فِيهِ، مَثَلُ الْحَيِّ وَالْمَيِّتِ».
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तथा अबू मूसा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"उस व्यक्ति की मिसाल जो अपने रब को याद करता है और उसकी मिसाल जो अपने रब को याद नहीं करता, जीवित और मृत की सी है।" सही मुस्लिम के शब्द हैं : "उस घर की मिसाल जिसमें अल्लाह को याद किया जाता है और उस घर की मिसाल जिसमें अल्लाह को याद नहीं किया जाता, जीवित और मृत जैसी है।"