عن أبي سعيد الخدري -رضي الله عنه- قال: كان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- أَشَدَّ حياءً من العَذْرَاءِ في خِدْرِهَا، فإذا رأى شيئا يَكْرَهُهُ عرفناه في وجهه.
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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अबू सईद ख़ुदरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर्दानशीं अविवाहित लड़की से भी अधिक हया वाले थे। परन्तु, जब कोई ऐसी चीज़ देखते, जिसे नापसंद करते, तो हम उसे आपके चेहरे पर पहचान लेते।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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