عن صُهيب بن سِنان الرومي -رضي الله عنه- مرفوعاً: «عجَبًا لِأَمر المُؤمِن إِنَّ أمرَه كُلَّه له خير، وليس ذلك لِأَحَد إِلَّا لِلمُؤمِن: إِنْ أَصَابَته سَرَّاء شكر فكان خيرا له، وإِنْ أَصَابته ضّرَّاء صَبَر فَكَان خيرا له».
[صحيح.] - [رواه مسلم.]
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सुहैब बिन सिनान रूमी (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "मोमिन का मामला भी बड़ा अजीब है। उसके हर काम में उसके लिए भलाई है। जबकि यह बात मोमिन के सिवा किसी और के साथ नहीं है। यदि उसे ख़ुशहाली प्राप्त होती है और वह शुक्र करता है, तो यह भी उसके लिए बेहतर है और अगर उसे तकलीफ़ पहुँचती है और सब्र करता है. तो यह भी उसके लिए बेहतर है।"
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व्याख्या

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