عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ مَسْعُودٍ رَضيَ اللهُ عنهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ:
«اللهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْهُدَى وَالتُّقَى، وَالْعَفَافَ وَالْغِنَى».
[صحيح] - [رواه مسلم] - [صحيح مسلم: 2721]
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अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाया करते थे :
"ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार और बेनियाज़ी (निस्पृहता) माँगता हूँ।"
[स़ह़ीह़] - [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 2721]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो दुआएँ किया करते थे, उनमें से एक दुआ यह है : «अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुकल हुदा» यानी ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सीधा रास्ता यानी सत्य की पहचान और उसपर अमल करने का सुयोग, «वत-तुक़ा» आदेशों तथा निषेधों के अनुपालन का जज़्बा, «वल-अफ़ाफ़» अवैध एवं अनुचित बातों तथा कार्यों से बचने की शक्ति, «वल-ग़िना» और सृष्टियों से निस्पृहता की दुआ करता हूँ, कि तेरे द्वार के अतिरिक्त किसी और के द्वार पर जाने की आवश्यकता न हो।