عن البراء بن عازب -رضي الله عنهما- أنَّ النبيَّ -صلى الله عليه وسلم- قال في الأَنصَار: «لاَ يُحِبُّهُم إِلاَّ مُؤمِن، وَلاَ يُبْغِضُهُم إِلاَّ مُنَافِق، مَنْ أَحَبَّهُم أَحَبَّهُ الله، وَمَنْ أَبْغَضَهُم أَبْغَضَه اللَّه».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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बरा बिन आज़िब (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अंसार के बारे में फ़रमायाः "उनसे वही प्रेम करेगा, जो मोमिन होगा और उनसे वही द्वेष रखेगा, जो मुनाफ़िक़ होगे। जो उनसे प्रेम करेंगे, अल्लाह उनसे प्रेम करेगा और जो उनसे द्वेष रखेेंगे, अल्लाह उनसे द्वेष रखेगा।"
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व्याख्या

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