عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بن مسعودٍ رضي الله عنه قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ:
«إِنَّ مِنْ شِرَارِ النَّاسِ مَنْ تُدْرِكُهُ السَّاعَةُ وَهُمْ أَحْيَاءٌ، وَمَنْ يَتَّخِذُ الْقُبُورَ مَسَاجِدَ».

[حسن] - [رواه أحمد] - [مسند أحمد: 3844]
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अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है :
"वह लोग सबसे बुरे लोगों में से हैं, जो क़यामत आते समय जीवित रहेंगे तथा जो क़ब्रों को मस्जिद बना लेंगे।"

[ह़सन] - [इसे अह़मद ने रिवायत किया है] - [मुसनद अह़मद - 3844]

स्पष्टीकरण

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि सबसे बुरे लोग कौन हैं। आपने बताया कि सबसे बुरे लोग वह हैं, जो उस समय जीवित रहेंगे, जब क़यामत क़ायम होगी। इसी तरह सबसे बुरे लोगों में वह लोग भी शामिल हैं, जो क़ब्रों को मस्जिद बना लेंगे और उनके पास तथा उनकी ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ेंगे।

हदीस के कुछ फ़ायदे

  1. क़ब्रों पर मस्जिद बनाना हराम है, क्योंकि इससे शिर्क के द्वार खुलते हैं।
  2. क़ब्रों के पास नमाज़ पढ़ना हराम है, चाहे मस्जिद न भी बनाई जाए। क्योंकि मस्जिद उस जगह का नाम है, जहाँ सजदा किया जाए, चाहे भवन न भी हो।
  3. नेक लोगों की क़ब्रों को, वहाँ नमाज़ पढ़ने के इरादे से मस्जिद बनाने वाला सबसे बुरे लोगों में से है, चाहे उसका दावा अल्लाह की निकटता प्राप्त करने ही का क्यों न हो।
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