عن أبي هريرة -رضي الله عنه- قال: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ، لاَ تَدْخُلُوا الجَنَّة حَتَّى تُؤْمِنُوا، وَلاَ تُؤْمِنُوا حَتَّى تَحَابُوا، أَوَلاَ أَدُلُّكُم عَلَى شَيءٍ إِذَا فَعَلْتُمُوهُ تَحَابَبْتُم؟ أَفْشُوا السَّلاَم بَينَكُم».
[صحيح.] - [رواه مسلم.]
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अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, तुम जन्नत मेें उस समय तक प्रवेश नहीं कर सकते, जब तक ईमान न लाओ, और तुम उस समय तक मोमिन नहीं हो सकते, जब तक एक-दूसरे से प्रेम न करने लगो। क्या मैं तुम्हारा पथ पर्दशन ऐसे कार्य की ओर न कर दूँ, जिसे यदि तुम करोगे, तो एक-दूसरे से प्रेम करने लगोगे? अपने बीच में सलाम को आम करो।"
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व्याख्या

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