عن جابر رضي الله عنه قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:
«أَفْضَلُ الذِّكْرِ: لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ، وَأَفْضَلُ الدُّعَاءِ: الْحَمْدُ لِلهِ».

[حسن] - [رواه الترمذي والنسائي في الكبرى وابن ماجه] - [سنن الترمذي: 3383]
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जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैं ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह फरमाते हुए सुना :
"सबसे उत्तम ज़िक्र 'ला इलाहा इल्लल्लाह' और सबसे उत्तम दुआ 'अल-हम्दु लिल्लाह' है।"

[ह़सन] - [इसे तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में एवं इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया है] - [सुनन तिर्मिज़ी - 3383]

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि सबसे उत्तम ज़िक्र "ला इलाहा इल्लल्लाह" है, जिसका अर्थ है, अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है। जबकि सबसे उत्तम दुआ "अल-हम्दु लिल्लाह" है, जो इस बात का एतराफ़ है कि सारी नेमतें (अनुग्रह) प्रदान करने वाला अल्लाह है, जो संपूर्ण सुंदर गुणगान का हक़दार है।

हदीस का संदेश

  1. कलिमा-ए-तौहीद के द्वारा अधिक से अधिक अल्लाह का ज़िक्र और अल्लाह की प्रशंसा के द्वारा अधिक से अधिक उससे दुआ करने की प्रेरणा।
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