عَنْ عَائِشَةَ رضي الله عنها قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم:
«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ فِيهِ فَهُوَ رَدٌّ» متفق عليه.
ولمسلم: «مَنْ عَمِلَ عَمَلًا لَيْسَ عَلَيْهِ أَمْرُنَا فَهُوَ رَدٌّ».
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आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया :
"जिसने हमारे इस दीन में कोई ऐसी नई चीज़ बनाली, जो उसका हिस्सा नहीं है, तो वह ग्रहणयोग्य नहीं है।" (सहीह बुख़ारी एवं सहीह मुस्लिम) सहीह मुस्लिम की एक रिवायत में है : "जिसने कोई ऐसा कार्य किया, जिसके संबंध में हमारा आदेश नहीं है, तो वह ग्रहणयोग्य नहीं है।"