عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«أَسْوَأُ النَّاسِ سَرَقَةً الَّذِي يَسْرِقُ صَلَاتَهُ» قَالَ: وَكَيْفَ يَسْرِقُ صَلَاتَهُ؟ قال: «لَا يُتِمُّ رُكُوعَهَا، وَلَا سُجُودَهَا».
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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया :
"सबसे बुरा चोर वह है, जो अपनी नमाज़ में चोरी करता है।" किसी सहाबी ने पूछा कि नमाज़ में चोरी करने का क्या मतलब है? आपने उत्तर दिया : "रुकू एवं सजदा संपूर्ण रूप से न किया जाए।"