عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ رضي الله عنهما أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَامَ بَعْدَ أَنْ رَجَمَ الْأَسْلَمِيَّ فَقَالَ:
«اجْتَنِبُوا هَذِهِ الْقَاذُورَةَ الَّتِي نَهَى اللَّهُ عَنْهَا فَمَنْ أَلَمَّ فَلْيَسْتَتِرْ بِسِتْرِ اللَّهِ وَلْيُتُبْ إِلَى اللَّهِ، فَإِنَّهُ مَنْ يُبْدِ لْنَا صَفْحَتَهُ نُقِمْ عَلَيْهِ كِتَابَ اللَّهِ عز وجل».
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अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम असलमी को संगसार करने के बाद खड़े हुए और फ़रमाया :
"अल्लाह के मना किए हुए इस गंदे काम से बचो। फिर, जिससे इस प्रकार का कोई गुनाह हो जाए, वह अल्लाह के पर्दे में छुप जाए और अल्लाह के सामने तौबा कर ले। जो हमारे सामने अपने गुनाह ज़ाहिर करेगा, हम उसपर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह की किताब लागू करेंगे।"