عَنْ ابْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ:
«إِذَا رَأَيْتُمُوهُ فَصُومُوا، وَإِذَا رَأَيْتُمُوهُ فَأَفْطِرُوا، فَإِنْ غُمَّ عَلَيْكُمْ فَاقْدُرُوا لَهُ».
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अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है :
"जब तुम (रमज़ान का) चाँद देखो, तो रोज़ा रखो और जब (शव्वाल का) चाँद दखो, तो रोज़ा रखना बंद कर दो। (और) अगर आकाश बादल से ढका हुआ हो, तो उसका अंदाज़ा लगा लो। (यानी महीने के तीस दीन पूरे कर लो।"