عَنْ جَرِيرِِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رضي الله عنه قَالَ:
بَايَعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى شَهَادَةِ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ، وَإِقَامِ الصَّلاَةِ، وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ، وَالسَّمْعِ وَالطَّاعَةِ، وَالنُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ.
المزيد
जरीर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं :
मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अल्लाह के अतिरिक्त किसी के सत्य पूज्य न होने और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अल्लाह के रसूल होने, नमाज़ पढ़ने, ज़कात देने, सुनने तथा मानने और हर मुसलमान का भला चाहने (के इक़रार) पर बैअत की।