عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما:
أَنَّ نَبِيَّ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقُولُ عِنْدَ الْكَرْبِ: «لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ الْعَظِيمُ الْحَلِيمُ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَرَبُّ الْأَرْضِ وَرَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ».
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अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- से रिवायत है कि :
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- परेशानी के समय यह दुआ पढ़ा करते थे : (अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, जो महान एवं सहिष्णु है। अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, जो महान सिंहासन का रब है। अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, जो आकाशों, धरती एवं सम्मानित सिंहासन का रब है।)