عن أبي سعيد الخُدْرِي -رضي الله عنه- قال: جلس رسول الله -صلى الله عليه وسلم- على المِنْبَر، وجلسنا حوله، فقال: «إنَّ مما أخاف عليكم من بَعدي ما يُفتح عليكم من زهرة الدنيا وزِيَنتها».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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अबू सईद खुद्री- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मिंबर पर बैठे और हम भी आपके आस-पास बैठ गए। आपने कहाः मैं अपने बाद तुम्हारे बारे में जिन चीज़ों से डरता हूँ, उनमें से एक दुनिया की चमक-दमक और उसकी माया के दरवाज़ों का खुलना है।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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