عَنْ جَابِرٍ رَضيَ اللهُ عنهُ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«إِنَّ مِنْ أَحَبِّكُمْ إِلَيَّ وَأَقْرَبِكُمْ مِنِّي مَجْلِسًا يَوْمَ القِيَامَةِ أَحَاسِنَكُمْ أَخْلاَقًا، وَإِنَّ أَبْغَضَكُمْ إِلَيَّ وَأَبْعَدَكُمْ مِنِّي مَجْلِسًا يَوْمَ القِيَامَةِ الثَّرْثَارُونَ وَالمُتَشَدِّقُونَ وَالمُتَفَيْهِقُونَ»، قَالُوا: يَا رَسُولَ اللهِ، قَدْ عَلِمْنَا الثَّرْثَارُونَ وَالمُتَشَدِّقُونَ فَمَا الْمُتَفَيْهِقُونَ؟ قَالَ: «الْمُتَكَبِّرُونَ».
[صحيح] - [رواه الترمذي] - [سنن الترمذي: 2018]
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जाबिर -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"तुममें से मेरी नज़र में सबसे प्यारे और क़यामत के दिन मेरे सबसे अधिक करीब बैठने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले लोग वह होंगे, जो आचरण के ऐतबार से तुममें सबसे अच्छे हैं। और मेरी नज़र में सबसे अधिक घृणित और क़यामत के दिन मुझसे सबसे अधिक दूर बैठने वाले लोग, बहुत अधिक बकबकाने वाले, अपनी बातों से अहंकार दर्शाने वाले और 'मुतफ़ैहिक़ून' होंगे।" सहाबा ने कहा : "हम बकबकाने वालों और अपनी बातों से अहंकार दर्शाने वालों को तो समझ गए, परन्तु 'मुतफ़ैहिक़ून' शब्द समझ में नहीं आया। आपने कहा : "घमंडी एवं अहंकारी।"
[सह़ीह़] - [इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।] - [سنن الترمذي - 2018]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि लोगों के अंदर दुनिया में आपके सबसे प्रिय और क़यामत के दिन सबसे निकट बैठने वाले लोगों में वह लोग भी शामिल होंगे, जिनका व्यवहार सबसे अच्छा होगा। "الثرثارون" का अर्थ है : बनावट के साथ बहुत ज़्यादा बात करने वाले। "المتشدقون" का अर्थ है : बिना किसी एहतियात के और अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनते हुए बहुत ज़्यादा बात करने वाले। सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम इस हदीस में आए हुए दो शब्दों "الثرثارون" तथा "والمتشدقون" का अर्थ समझ गए, लेकिन यह "المتفيهقون" कौन लोग हैं? आपने उत्तर दिया : लोगों का मज़ाक़ उड़ाने वाले ऐसे लोग, जो बहुत ज़्यादा बातूनी होते हैं।