عَنْ أَبِي العَبَّاسِ سَهْلِ بْنِ سَعِدٍ السَّاعِدِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، دُلَّنِي عَلَى عَمَلٍ إِذَا عَمِلْتُهُ أَحَبَّنِي اللَّهُ وَأَحَبَّنِي النَّاسُ، فَقَالَ:
«ازْهَدْ فِي الدُّنْيَا يُحِبُّكَ اللَّهُ، وَازْهَدْ فِيمَا عِنْدَ النَّاسِ يُحِبُّكَ النَّاسُ».
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अबुल अब्बास सह्ल बिन साद साइदी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और बोला : ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे कोई ऐसा कार्य बताइए कि मैं उसे करूँ, तो अल्लाह का प्यारा हो जाऊँ और लोगों का भी प्यारा हो जाऊँ। आपने कहा :
"दुनिया के मोह से आज़ाद रहो, अल्लाह का प्यारा बन जाओगे और लोगों के पास जो कुछ है, उसका लोभ न करो, लोग भी तुम्हें प्यार देंगे।"