عن أبي هريرة قال: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «ألا أَدُلُّكُم على ما يَمْحُو الله به الخطايا ويرفع به الدرَجات؟» قالوا: بلى، يا رسول الله، قال: «إِسْبَاغُ الوُضُوء على المَكَارِه، وكَثْرَةُ الخُطَا إلى المساجد، وانتظارُ الصلاة بعد الصلاة فذلِكُم الرِّباط».
[صحيح.] - [رواه مسلم.]
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अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "क्या मैं तुम्हें ऐसी बातें न बताऊँ, जिनके ज़रिए अल्लाह तआला गुनाहों को मिटा देता है और दर्जे ऊँचे कर देता है?" सहाबा ने कहाः अवश्य ऐ अल्लाह के रसूल। फ़रमायाः "कठिन परिस्थितियों के बावजूद अच्छी तरह वज़ू करना, मस्जिद की ओर ज़्यादा कदमों से चलकर जाना और नमाज़ के बाद नमाज़ की प्रतीक्षा करना। यही पहरेदारी है।"
सह़ीह़ - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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