عن سهل بن سعد -رضي الله عنه- مرفوعًا: «رِبَاطُ يَوْمٍ فِي سَبِيلِ الله خَيْرٌ مِنْ الدُّنْيَا وَمَا عَلَيْهَا، وَمَوْضِعُ سَوْطِ أَحَدِكُمْ فِي الْجَنَّةِ خَيْرٌ مِنْ الدُّنْيَا وَمَا عَلَيْهَا، وَالرَّوْحَةُ يَرُوحُهَا الْعَبْدُ فِي سَبِيلِ الله وَالْغَدْوَةُ خَيْرٌ مِنْ الدُّنْيَا وَمَا فِيهَا».
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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सह्ल बिन साद (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रास्ते में एक दिन की पहरेदारी दुनिया और उसकी सारी वस्तुओं से बेहतर है। तथा जन्नत में कोड़े रखने के बराबर स्थान दुनिया और उसकी सारी वस्तुओं से बेहतर है। तथा एक शाम एवं एक सुबह अल्लाह के रास्ते में निकलना दुनिया तथा उसकी सारी वस्तुओं से बेहतर है।
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व्याख्या

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस में बाताया है कि एक दिन सीमा पर पहरा देना, एक दिन सुबह को अल्लाह के रास्ते में निकलना अथवा जन्नम के अंदर एक कोड़े के बराबर स्थान, इनमें हर वस्तु, दुनिया एवं उसकी सारी वस्तुओं से उत्तम है। ऐसा इसलिए, क्योंकि जन्नत शाश्वत तथा चिरस्थायी है और दुनिया नाशवान और यह बात सबको पता है कि सदा रहने वाली थोड़ी वस्तु ख़त्म हो जाने वाली अधिक वस्तु से उत्तम है।

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