عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ:
«لاَ يَزَالُ قَلْبُ الكَبِيرِ شَابًّا فِي اثْنَتَيْنِ: فِي حُبِّ الدُّنْيَا وَطُولِ الأَمَلِ».
[صحيح] - [رواه البخاري] - [صحيح البخاري: 6420]
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है :
"बूढ़े व्यक्ति का दिल हमेशा दो चीज़ों में जवान रहता है। दुनिया से प्रेम और लम्बी-लम्बी आशाओं में।"
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अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि इन्सान बूढ़ा हो जाता है और उसका शरीर कमज़ोर हो जाता है, लेकिन उसका दिल दो चीज़ों की मोहब्बत में जवान रहता है : 1- दुनिया की मोहब्बत अधिक से अधिक धन दौलत की चाहत करके। 2- लंबा जीवन, लंबी उम्र और आशाएँ।