عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ:
«لاَ يَزَالُ قَلْبُ الكَبِيرِ شَابًّا فِي اثْنَتَيْنِ: فِي حُبِّ الدُّنْيَا وَطُولِ الأَمَلِ».

[صحيح] - [رواه البخاري] - [صحيح البخاري: 6420]
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है :
"बूढ़े व्यक्ति का दिल हमेशा दो चीज़ों में जवान रहता है। दुनिया से प्रेम और लम्बी-लम्बी आशाओं में।"

[स़ह़ीह़] - [इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ बुख़ारी - 6420]

स्पष्टीकरण

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि इन्सान बूढ़ा हो जाता है और उसका शरीर कमज़ोर हो जाता है, लेकिन उसका दिल दो चीज़ों की मोहब्बत में जवान रहता है : 1- दुनिया की मोहब्बत अधिक से अधिक धन दौलत की चाहत करके। 2- लंबा जीवन, लंबी उम्र और आशाएँ।

हदीस के कुछ फ़ायदे

  1. मानव स्वभाव का बयान कि वह दुनिया की मोहब्बत में रहता है और लंबी-लंबी आशाएँ रखता है।
  2. लंबी-लंबी उम्मीदें पालने और धन एकत्र करने के लालच की बुराई की ओर इशारा। जिससे यह ज्ञात होता है कि इन्सान को मौत की तैयारी करनी चाहिए, धनी है तो सदक़ा करना चाहिए और निर्धन है तो किसी के सामने हाथ फैलाने से बचना चाहिए।
  3. इन्सान की सबसे प्रिय वस्तु स्वयं वही है। अतः उसकी चाहत होती है कि वह बाक़ी रहे। इसी लिए वह लंबी उम्र चाहता है। वह धन भी चाहता है कि धन स्वास्थ्य एवं सुविधा का एक महत्वपूर्ण साधन है। अतः जैसे-जैसे उसे इन दोनों चीज़ों के समाप्त होने के समय के निकट होने का एहसास होता जाता है, वैसे-वैसे इनके लिए उसका प्रेम एवं इन्हें बाक़ी रखने की इच्छा प्रबल होती जाती है।
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भाषा: الإنجليزية الإندونيسية البنغالية अधिक (33)
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