عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«إِيَّاكُمْ وَمُحَقَّرَاتِ الذُّنُوبِ، فَإِنَّمَا مَثَلُ مُحَقَّرَاتِ الذُّنُوبِ كَقَوْمٍ نَزَلُوا فِي بَطْنِ وَادٍ، فَجَاءَ ذَا بِعُودٍ، وَجَاءَ ذَا بِعُودٍ، حَتَّى أَنْضَجُوا خُبْزَتَهُمْ، وَإِنَّ مُحَقَّرَاتِ الذُّنُوبِ مَتَى يُؤْخَذْ بِهَا صَاحِبُهَا تُهْلِكْهُ».
[صحيح] - [رواه أحمد] - [مسند أحمد: 22808]
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सह्ल बिन साद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"तुम लोग छोटे-छोटे गुनाहों से बचा करो। क्योंकि छोटे-छोटे गुनाहों का उदाहरण इस तरह समझो कि कुछ लोग किसी वादी में रुके, फिर एक आदमी एक लकड़ी ले आया और दूसरा व्यक्ति एक लकड़ी, यहाँ तक कि उन्होंने अपनी रोटियाँ पका लीं। छोटे-छोटे गुनाहों के आधार पर जब इन्सान की पकड़ होगी, तो ये उसका विनाश कर देंगी।"
[सह़ीह़] - [इसे अह़मद ने रिवायत किया है।] - [مسند أحمد - 22808]
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने छोटे गुनाहों के मामले में लापरवाही बरतने और उनमें अधिक संलिप्त होने से मना किया है। क्योंकि ये छोटे-छोटे गुनाह मिलकर इन्सान के विनाश का सबब बन जाते हैं। आपने समझाने के लिए इसका उदाहरण यह दिया कि जैसे कुछ लोग किसी वादी में उतरे और हर व्यक्ति ने एक-एक छोटी-छोटी लकड़ी लाकर रख दी, जिससे इतनी लकड़ियाँ एकत्र हो गईं कि खाना बन जाए। फिर आपने बताया कि मामूली समझे जाने वाले गुनाह भी, जब उनसे तौबा न की जाए और अल्लाह की ओर से माफ़ी का परवाना न मिले, पकड़ होने पर विनाश का सबब बन जाते हैं।