عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«بَدَأَ الْإِسْلَامُ غَرِيبًا، وَسَيَعُودُ كَمَا بَدَأَ غَرِيبًا، فَطُوبَى لِلْغُرَبَاءِ».

[صحيح] - [رواه مسلم] - [صحيح مسلم: 145]
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"इस्लाम की शुरूआत एक अजनबी धर्म के रूप में हुई और शीघ्र ही वह पहले के समान अजनबी बन जाएगा। ऐसे में, शुभ सूचना है अजनबियों के लिए।"

[स़ह़ीह़] - [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 145]

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि इस्लाम का आरंभ इक्का-दुक्का लोगों के साथ अजनबीपन भरे माहौल में हुआ था और फिर एक समय आएगा जब वह दोबारा अजनबी बन जाएगा तथा उसका पालन करने वालों की संख्या घट जाएगी। इसलिए बहुत ख़ूब हैं इस प्रकार के अजनबी लोग। उन्हें बड़ी ख़ुशी और आँखों की ठंडक मिलने वाली है।

हदीस का संदेश

  1. इस हदीस में इस बात की सूचना दी गई है कि इस्लाम फैलने तथा प्रचलित हो जाने के वाद फिर से अजनबी बन जाएगा।
  2. यह हदीस मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सच्चे नबी होने की एक बड़ी निशानी है। क्योंकि इसमें की गई आपकी एक भविष्यवाणी सच्ची होती हुई दिख रही है।
  3. इस्लाम की ख़ातिर वतन तथा परिवार को छोड़ने की फ़ज़ीलत। ऐसे व्यक्ति के लिए जन्नत है।
  4. ग़ुरबा, वह लोग हैं, जो लोगों में बिगाड़ पैदा हो जाने के बाद सुधार कार्य करते हैं। लोगों में व्याप्त बिगाड़ को सुधारते हैं।
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