عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ مَسْعُودٍ رَضيَ اللهُ عنهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:
«لاَ تَتَّخِذُوا الضَّيْعَةَ فَتَرْغَبُوا فِي الدُّنْيَا».

[حسن لغيره] - [رواه الترمذي وأحمد] - [سنن الترمذي: 2328]
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अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"तुम जायदाद मत बनाओ, अन्यथा दुनिया की चाहत में पड़ जाओगे।"

[ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर ह़सन)] - [इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है] - [सुनन तिर्मिज़ी - 2328]

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जायदाद, बाग़ और खेत रखने से मना किया है, क्योंकि यह चीज़ें इन्सान को आख़िरत से हटाकर दुनिया में लीन करने का कारण बनती हैं।

हदीस का संदेश

  1. दुनिया इतना एकत्र करने की मनाही कि आख़िरत से विमुखता का कारण बन जाए।
  2. इस हदीस में जीविका कमाने के साधन अपनाने से नहीं, बल्कि इस दुनिया में लीन होकर आख़िरत को भूल जाने से मना किया गया है।
  3. सिंधी कहते हैं : इस हदीस का मतलब है : तुम जायदाद बनाने में इतना मग्न मत हो जाओ कि आख़िरत को याद करना ही भूल जाओ।
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