عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ رضي الله عنهما أنَّ رَسولَ اللَّهِ صلَّى اللَّهُ عليْه وسلَّمَ، قال:
«قَدْ أَفْلَحَ مَن أَسْلَمَ، وَرُزِقَ كَفَافًا، وَقَنَّعَهُ اللَّهُ بما آتَاهُ».

[صحيح] - [رواه مسلم] - [صحيح مسلم: 1054]
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अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"वह व्यक्ति सफल हो गया, जिसने इस्लाम ग्रहण कर लिया तथा उसे ज़रूरत भर रोज़ी मिल गई और अल्लाह ने जो कुछ उसे दिया है, उससे संतुष्ट रहा।"

[स़ह़ीह़] - [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 1054]

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि वह व्यक्ति सफल हो गया, जो अपने पालनहार का आज्ञाकारी बन गया, उसे इस्लाम धर्म का पालन करने का सुयोग मिला, आवश्यकता अनुसार हलाल रोज़ी मिल गई तथा अल्लाह के अनुग्रह से उसकी दी हुई नेमतों पर संतुष्ट रहा।

हदीस का संदेश

  1. किसी व्यक्ति की खुशी इस बात में निहित है कि उसका धर्म परिपूर्ण हो, उसकी आजीविका पर्याप्त हो और वह अल्लाह द्वारा दी दी हुई चीज़ों से संतुष्ट रहे।
  2. इस्लाम का पालन तथा सुन्नत का अनुसरण करने के साथ-साथ अल्लाह दी हुई चीज़ों से संतुष्ट रहने की प्रेरणा।
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