عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضيَ اللهُ عنهُ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:
«رُبَّ أَشْعَثَ مَدْفُوعٍ بِالْأَبْوَابِ لَوْ أَقْسَمَ عَلَى اللهِ لَأَبَرَّهُ».

[صحيح] - [رواه مسلم] - [صحيح مسلم: 2622]
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :
"बहुत-से बिखरे हुए बालों वाले और दरवाज़ों से भगा दिए जाने वाले लोग ऐसे हैं कि यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उनकी क़समों की लाज रख ले।"

[स़ह़ीह़] - [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है] - [सह़ीह़ मुस्लिम - 2622]

व्याख्या

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि कुछ लोगों के बाल बिखरे और धूल भरे होते हैं। वे अपने बालों में तेल नहीं लगाते और न ही उन्हें नियमित रूप से धोते हैं। लोग उन्हें महत्व नहीं देते तथा तिरस्कारपूर्वक अपने दरवाज़े से लौटा देते हैं। लेकिन अल्लाह की नज़र में उनका दर्जा इतना ऊँचा है कि अगर वे किसी काम को करने की क़सम खा लें, तो अल्लाह उनकी क़सम की लाज रखने हुए उसे पूरा कर दे।

हदीस का संदेश

  1. अल्लाह बंदे का रूप नहीं, बल्कि उसका दिल तथा उसका कर्म देखता है।
  2. बंदे को शरीर एवं वस्त्र से अधिक कर्म हृदय की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए।
  3. अल्लाह के लिए विनम्रता धारण करना दुआ क़बूल होने का एक कारण है। यही कारण है कि अल्लाह अपने गुमनाम परहेज़गार बंदों की क़सम की लाज रख लेता है।
  4. इसी हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरबियत करने का एक अच्छा उदाहरण देखने को मिलता है। आपने यह शिक्षा इसलिए दी कि कोई किसी को तुच्छ न जाने।
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